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पंजाब कांग्रेस में घमासान जारी : सिद्धू विधायक जलालपुर के घर बंद कमरे में बैठक के बाद पहुंचे खन्ना

पंजाब कांग्रेस में घमासान जारी : सिद्धू विधायक जलालपुर के घर बंद कमरे में बैठक के बाद पहुंचे खन्ना

पंजाब कांग्रेस में घमासान जारी : सिद्धू विधायक जलालपुर के घर बंद कमरे में बैठक के बाद पहुंचे खन्ना लुधियाना/खन्ना : (पी9 ब्यूरो) :

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पंजाब कांग्रेस में घमासान जारी : सिद्धू विधायक जलालपुर के घर बंद कमरे में बैठक के बाद पहुंचे खन्ना

लुधियाना/खन्ना : (पी9 ब्यूरो) :

पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच नवजोत सिंह सिद्धू ने रविवार को भी अपनी सक्रियता जारी रखी। शनिवार को सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ से मुलाकात के बाद कई कांग्रेस विधायकों व मंत्रियों से मुलाकात की। रविवार को भी उनका यह मिशन जारी रहा। सिद्धू को रविवार को सीएम कै. अमरिंदर के शहर में ही पटियाला जिला के दो कांग्रेसी विधायकों ने समर्थन दिया। इसके बाद सिद्धू खन्ना पहुंचे, जहां विधायक गुरकीरत सिंह कोटली और विधायक लखवीर सिंह लक्खा ने उनका स्वागत किया।
इससे पहले सिद्धू के साथ बैठक में जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ-साथ गुरदासपुर से विधायक बरिंदर पाहड़ा और मोगा से विधायक दर्शन सिंह बराड़ भी शामिल हुए। यह मीटिंग घनौर से विधायक मदन लाल जलालपुर के जलालपुर गांव स्थित आवास पर हुई। यहां जलालपुर के साथ साथ शुतराणा (पटियाला) से विधायक निर्मल सिंह भी मौजूद रहे। इस मौके हुई चर्चा के बारे में सिद्धू ने पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी और करीब एक घंटा बंद कमरे में मीटिंग करने के बाद वापस पटियाला स्थित अपने आवास पहुंचे।

जलालपुर ने खुलकर हिमायत की सिद्धू की

किसी समय कै. अमरिंदर की धर्मपत्नी और सांसद परनीत कौर के खासमखास माने जाने वाले घनौर के विधायक मदन लाल जलालपुर ने रविवार को खुलकर कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी सौंप दी जानी चाहिए। इस बारे में उन्होंने कहा कि चाहे सिद्धू को किसी विधायक की हिमायत हासिल नहीं, लेकिन उन्हें इस बारे में पब्लिक की सपोर्ट हासिल है। अगर पार्टी हाईकमान यहां पब्लिक सपोर्ट का नजरअंदाज करेगी तो इससे पार्टी का ही नुकसान होगा।

प्रताप बाजवा का किया विरोध

जलालपुर ने राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा की आलोचना कि वह सिद्धू को प्रधानगी दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यही लीडर पहले कै. अमरिंदर का विरोध करते रहे हैं। इसी कारण कांग्रेस को नुकसान भी पहुंचा और अकाली दल लगातार दस साल सत्ता पर काबिज रहा। उन्होंने कहा कि कै. अमरिंदर सिंह महाराजा हैं और उन्हें इस बारे में महाराजा जैसा दिल दिखाते हुए नवजोत सिद्धू से माफी मगवाने जैसी छोटी डिमांड नहीं करनी चाहिए।

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