फर्जी जमानत करवाने वाला गिरोह : फर्जी आधार कार्ड से जमानत कराने वाले 7 गिरफ्तार, कई जिलों में था नेटवर्क, सबसे ज्यादा जालंधर में सक्रिय गैंग, मालवा म
फर्जी जमानत करवाने वाला गिरोह : फर्जी आधार कार्ड से जमानत कराने वाले 7 गिरफ्तार, कई जिलों में था नेटवर्क, सबसे ज्यादा जालंधर में सक्रिय गैंग, मालवा में भी जाते थे
डॉक्यूमेंट तैयार करने वाली जालंधर की महिला फरार, 150 में बनाते थे आधार कार्ड
जालंधर : (पी9 ब्यूरो) :

मोगा, होशियारपुर, जालंधर समेत कई जिलों में फर्जी जमानत करवाने वाले गिरोह के 7 लोगों को जालंधर की थाना नई बारादरी की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों में मां-बेटा भी शामिल है। आरोपी जमानत कराने में इस्तेमाल हाेने वाले आधार कार्ड, जमाबंदी और शिनाख्ती कार्ड जालंधर कचहरी चौक के पास स्थित चांद फोटो स्टेट में तैयार कराते थे।
फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार करने वाली महिला रजनी फरार है। पुलिस ने मोगा के गांव सैयद जमालपुर निवासी किंगपिन तिरलोक सिंह, संदीप सिंह, जसविंदर कौर, धर्मकोट के गुरमेल सिंह, हरबंस सिंह, बलवीर सिंह और विजय कुमार को कोर्ट में पेश कर 2 दिन के रिमांड पर लिया है। संदीप जसविंदर कौर का बेटा है।
जांच में पता चला कि आरोपी 150 रुपए में फर्जी आधार कार्ड तैयार करवा लेते थे। उनसे 29 फर्जी आधार कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट बरामद हुए हैं। पुलिस ने जसविंदर कौर को पकड़ा तो उसके कब्जे से 18 आधार कार्ड बरामद हुए। एसीपी ने कहा कि रजनी के पकड़े जाने के बाद फर्जी आधार कार्ड कैसे तैयार किए जाते थे, इसका पता लगाया जाएगा।
एक महिला के 18 आधार कार्ड नाम और फोटो चेंज
जसविंदर कौर से पुलिस ने 18 आधार कार्ड बरामद किए। सभी में अलग-अलग नाम पर फोटो एक थी। जांच में पता चला कि गैंग मोगा, होशियारपुर व जालंधर में फर्जी जमानत करवाता था। – जसविंदर कौर कहती है कि वह पहले अकेली आती थी। अब बेटे को भी साथ ले आई ताकि डबल पैसे मिल सकें।
ऐसे हुआ पर्दाफाश
गिरोह की सूचना के बाद ली थी सभी की तलाशी
एसीपी सतिंदर चड्डा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली कि उनके एरिया में फर्जी जमानती गैंग सक्रिय है। एएसआई बलविंदर सिंह ने टीम के साथ मिलकर ट्रैप लगा 7 आरोपी कचहरी चौक के पास से पकड़ लिए। तलाशी ली तो 13 आधार कार्ड के साथ-साथ 11 अन्य डॉक्यूमेंट मिले।
12वीं पास किंगपिन
अमृतसर के एक शख्स से मिलकर बनाई अपनी गैंग
पूछताछ में किंगपिन तिरलोक ने माना कि वह 12वीं पास है। कुछ साल पहले अमृतसर के एक शख्स से मुलाकात के बाद वह फर्जी जमानती गैंग से जुड़ा था। इसके बाद अपनी गैंग बनाई थी। तिरलोक के साथी की तलाश की जा रही है। क्योंकि वह ही कोर्ट में फर्जी जमानत लगवाता था।
अपराध की वजह कोराेना
जमानत के लिए जाने पर मिलते थे 1 हजार रुपए
पूछताछ में आरोपियों ने माना कोरोना से काम बंद हो गया था। वह पहले मोगा कोर्ट में जमानत देने जाते थे। वहां 1 हजार रुपए मिलते थे। केवल उनकी फोटो और पैसे लिए जाते थे और डॉक्यूमेंट तैयार हो जाते थे। जमानत भरते समय बताया जाता था कि उनका नाम क्या है। उसी दिन पूरी रिहर्सल करवाई जाती थी।

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