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गुरु जी ने शहीदी देकर बचाया था कश्मीर पंडितों को :

शहर के लिम्का बुक रिकाॅर्ड होल्डर डॉ. सहगल ने बनाई संदेश देने वाली पतंग

गुरु जी ने शहीदी देकर बचाया था कश्मीर पंडितों को :

गुरु जी ने शहीदी देकर बचाया था कश्मीर पंडितों को : श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400 साला प्रकाश पर्व शहर के गुरु घरों में कोरोना गाइड लाइनों के बीच

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गुरु जी ने शहीदी देकर बचाया था कश्मीर पंडितों को : श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400 साला प्रकाश पर्व शहर के गुरु घरों में कोरोना गाइड लाइनों के बीच सादगी से मनाया गया

शहर के लिम्का बुक रिकाॅर्ड होल्डर डॉ. सहगल ने बनाई संदेश देने वाली पतंग

चंडीगढ़ : (पी9 ब्यूरो) :

सिखों के नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म आज के दिन अमृतसर में एक मई, 1621 में हुआ था। उनके प्रकाश पर्व पर आज शहर के गुरु घरों में कोरोना संक्रमण के कारण सादगी के बीच कोविड नियमों को ध्यान में रख कर मनाया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर जी को तिलक और जनेऊ के रक्षक के रूप में उन्हें तिलक-जंजू दे राखे के रूप में कहा जाता है। उस समय के मुगल शासक औरंगजेब जो पूरे भारत में इस्लाम की स्थापना करना चाहता था, उसे दिल्ली पहुंच कर गुरु जी ने समझाया था कि जबरदस्ती किसी को धर्म परिवर्तन के लिए नहीं कहा जा सकता। इससे नाराज होकर औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर का सिर कलम करने का हुक्म दिया था।

प्रकाश पर्व पर बनाई पतंग

गुरु जी की असीम शहादत को शहर के लिम्का बुक रिकॉर्ड होल्डर डॉ. दविंदरपाल सिंह सहगल ने अपनी पतंग में विशेष प्रकार से दिखाया है। विशेष प्रकार की पतंग बनाने में माहिर डॉ. सहगल ने गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी को अपनी पतंग में कई फोटोज के साथ दिखाया है। उनके अनुसार जब कश्मीर के पंडितों ने अपनी जान की रक्षा के लिए गुरु जी के सामने याचना की तो गुरु जी ने उन्हें बचाने का आश्वासन दिया था। सहगल ने कहा कि गुरु जी के 400 साला प्रकाश पर्व पर संदेश देने वाली पतंग बनाने में लगी फोटोज को एकत्र करने में काफी प्रयास करना पड़ा। उन्होंने कहा कि गुरु जी का प्रकाश पर्व लोगों को अपने घरों में मनाना चाहिए जिससे संक्रमण से बचा जा सके।

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