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आसाराम दुष्कर्म मामला :

आसाराम दुष्कर्म मामला :

आसाराम दुष्कर्म मामला : शिष्या से 10 साल पुराने रेप केस में आसाराम को आज सुनाई जाएगी सजा, 6 धाराओं में दोषी करार अहमदाबाद : (रवि वर्मा ब्यूरो) : 

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आसाराम दुष्कर्म मामला : शिष्या से 10 साल पुराने रेप केस में आसाराम को आज सुनाई जाएगी सजा, 6 धाराओं में दोषी करार

अहमदाबाद : (रवि वर्मा ब्यूरो) : 

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम 2013 से ही जोधपुर की जेल में बंद है

शिष्या के साथ दुष्कर्म के मामले में आसाराम बापू को गांधीनगर की अदालत ने दोषी ठहराया है। इस मामले में अदालत आज सजा पर फैसला सुनाएगी। 2013 के इस मामले में आसाराम को आईपीसी की 6 धाराओं के तहत दोषी माना गया है। दुष्कर्म का ये मामला आसाराम पर 2013 में दर्ज किया गया था। इस मामले में सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 6 लोगों को बरी कर दिया है, जिसमें आसाराम की पत्नी और बेटी भी शामिल है। गौरतलब है कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम 2013 से ही जोधपुर की जेल में बंद है।

2013 का है मामला?

सूरत की एक महिला ने 2013 में आसाराम बापू और सात अन्य लोगों के खिलाफ दुष्कर्म और अवैध तरीके से बंधक बनाने का मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में अहमदाबाद के चांदखेड़ा पुलिस थाने में FIR दर्ज हुई थी। एफआईआर के मुताबिक, महिला के साथ अहमदाबाद शहर के बाहर बने आश्रम में कई 2001 से 2006 के बीच कई बार दुष्कर्म किया गया था। ट्रायल के दौरान ही सात में एक आरोपी की मौत अक्टूबर 2013 में हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने जुलाई 2014 में चार्जशीट दाखिल की थी।

2014 में दाखिल हुई थी चार्जशीट

इस मामले में 2014 में जो चार्जशीट दाखिल की गई थी, उसमें सात आरोपियों को नामजद किया गया था। 2016 में चार्ज फ्रेम किए गए थे। बाद में आसाराम को अदालत ने दोषी ठहराया और शेष छह अभियुक्तों, उनकी पत्नी, उनकी बेटी और उनके आश्रम की चार महिला प्रशासकों को बरी कर दिया गया था।

किस धारा के तहत माना गया दोषी?

सेशन कोर्ट के जज डीके सोनी ने शिष्या से दुष्कर्म के मामले में आसाराम को दोषी माना है. बाकी सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर आरसी कोडेकर ने बताया कि अदालत ने आसाराम को आईपीसी की धारा 376 2(C) (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक यौन अपराध), 342 (अवैध रूप से बंधक बनाना), 354 (शीलभंग के इरादे से महिला पर आपराधिक हमला), 357 (हमला) और 506 (आपराधिक धमकी देना) के तहत दोषी ठहराया है।

आशुमल की जगह नाम रखा आसाराम

असली नाम आशुमल हरपलानी है। उनका जन्म अप्रैल 1941 में सिंध, पाकिस्तान के बेरानी गांव में हुआ था। 1947 के विभाजन के बाद परिवार अहमदाबाद में बस गया था। 1960 के दशक में आसाराम ने लीलाशाह को अपना गुरु बनाया था। आसाराम ने दावा किया कि गुरु ने उन्हें आसुमल की जगह आसाराम नाम दिया है। 1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से दस किलोमीटर दूर मोटेरा गांव के पास साबरमती नदी के किनारे अपनी छोटी सी झोपड़ी बनाई। आसाराम के भक्तों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी और गुजरात के कई शहरों और देश के विभिन्न राज्यों में भी उनके आश्रम खुलने लगे।

दो-तीन दशक में आश्रमों का साम्राज्य खड़ा कर दिया

शुरुआत में आसाराम ने अपने ‘व्याख्यान, देशी औषधि और भजन-कीर्तन’ से गुजरात के गांवों के गरीब, पिछड़े और आदिवासी लोगों को आकर्षित किया। बाद में धीरे-धीरे इसका प्रभाव गुजरात के शहरी क्षेत्रों के मध्यम वर्ग में भी बढ़ने लगा। शुरुआती वर्षों में आसाराम के व्याख्यानों के बाद प्रसाद के नाम पर मुफ्त भोजन दिया जाता था। इससे ‘भक्तों’ की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। दो-तीन दशकों में आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं ने मिलकर देश-विदेश में 400 आश्रमों का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। जैसे-जैसे आश्रमों और अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई, आसाराम की संपत्ति बढ़ने लगी। उनके पास करीब 10 हजार करोड़ की संपत्ति बताई गई थी। आसाराम द्वारा जमा की गई संपत्ति की जांच केंद्रीय और गुजरात कर विभाग और ईडी ने भी की थी। साथ ही जांच एजेंसियों ने जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाए गए आश्रमों की भी जांच की।

गवाहों पर लगातार होते रहे जानलेवा हमले

28 फरवरी, 2014 को सूरत की दो बहनों में से एक के पति पर सूरत में घातक हमला किया गया था। इसके 15 दिन बाद आसाराम के वीडियोग्राफर राकेश पटेल पर भी जानलेवा हमला किया गया। हमले के कुछ दिनों बाद सूरत के एक कपड़ा बाजार में तीसरे गवाह दिनेश भगनानी पर तेजाब फेंक दिया गया। ये तीनों गवाह उन हमले में तो बच गए थे। लेकिन 23 मार्च 2014 को चौथे गवाह अमृत प्रजापति पर को गोली मार दी गई थी। 17 दिनों के इलाज के बाद अमृत की मौत हो गई थी।

एक गवाह पर कोर्ट में ही हुआ हमला

जनवरी 2015 में एक अन्य गवाह अखिल गुप्ता की मुजफ्फरनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एक महीने बाद, आसाराम के निजी सहायक के रूप में काम करने वाले राहुल सचान पर हमला किया गया। जोधपुर कोर्ट में गवाही देने पहुंचे राहुल पर कोर्ट परिसर में जानलेवा हमला किया गया। राहुल सचान हमले में बच गए, लेकिन 25 नवंबर 2015 को लापता हो गए और तब से उनका कोई पता नहीं चला है। गवाहों पर हमलों का सिलसिला जारी रहा और 13 मई 2015 को पानीपत में महेंद्र चावला पर हमला किया गया। हालांकि, हमले में महेंद्र की जान बच गई थी। इसके तीन महीने बाद एक अन्य गवाह 35 वर्षीय कृपाल सिंह की जोधपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कृपाल सिंह ने जोधपुर कोर्ट में पीड़िता के पक्ष में गवाही दी थी।

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