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अरुण जेटली जीवित होते तो जीएसटी इतनी जटिल कर प्रणाली न होती : हरकेश मित्तल कैट अध्यक्ष पंजाब

अरुण जेटली जीवित होते तो जीएसटी इतनी जटिल कर प्रणाली न होती : हरकेश मित्तल कैट अध्यक्ष पंजाब

अरुण जेटली जीवित होते तो जीएसटी इतनी जटिल कर प्रणाली न होती : हरकेश मित्तल कैट अध्यक्ष पंजाब लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :  पूर्व केंद्रीय मंत्

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अरुण जेटली जीवित होते तो जीएसटी इतनी जटिल कर प्रणाली न होती : हरकेश मित्तल कैट अध्यक्ष पंजाब

लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) : 

पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अरुण जेटली की जन्म तिथि पर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा की यदि श्री जेटली आज जीवित होते तो जीएसटी कर प्रणांली इतनी जटिल न होती। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने उन्हें स्मरण करते हुए कहा की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सरल जीएसटी कर प्रणाली को देश में लागू करने और व्यापार एवं उद्योग को व्यापार करने में आसानी प्रदान करने के उद्देश्य के प्रति श्री जेटली पूर्ण रूप से समर्पित थे और यही कारण है की जब तक वो वित्त मंत्री रहे तब तक जीएसटी के नियमों में लगातार आवश्यकतानुसार संशोधन होते रहे। 
श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की जिस जीएसटी कर प्रणाली की परिकल्पना श्री जेटली ने की थी और जिस प्रणाली को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 1 जुलाई 2017 को संसद के केंद्रीय कक्ष से लागू किया था, वो जीएसटी देश में कहीं खो गया है और उसके स्थान पर एक बेहद उलझावपूर्ण एवं व्यापारियों को सदा परेशान करने वाली कर प्रणाली बन गई है। 
श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने याद करते हुए कहा की 4 जून 2017 को श्री जेटली ने कैट के एक प्रतिनिधिमंडल को अपने निवास पर बुलाया था और भारत में जीएसटी कर प्रणाली को लागू करने में सहयोग देने का आग्रह किया था। उन्होंने बताया की श्री जेटली ने मौटे तौर पर जीएसटी कर प्रणाली का खुलासा करते हुए बताया था की देश के व्यापारियों के लिए यह एक बेहद सरल कर प्रणाली है क्योंकि इसमें व्यापार से सम्बंधित अन्य सभी करों का समावेश होगा और प्रत्येक व्यापारी को हर महीने की 10 तारीख तक पिछले महीने की अपनी बिक्री के आंकड़े जीएसटी पोर्टल पर दर्ज़ करने होंगे जिसके दो दिन बाद जीएसटी विभाग व्यापारियों को उनका खरीदी विवरण भेजेगा जिसकी जांच करके व्यापारियों को उसी महीने की 15 तारीख तक वापिस विभाग को भेजना होगा। इसके पश्चात विभाग 16 तारीख तक व्यापारियों की कर देयता सूचित करेगा , जिसके अनुरूप व्यापारियों को 20 तारीख तक कर जमा करके अपनी रिटर्न दाखिल करनी होगी। श्री जेटली द्वारा बताया गए जीएसटी में इतने सारे फार्म भरने का झंझट नहीं था। उन्होंने यह भी बताया की जब तक श्री जेटली वित्त मंत्री रहे तब तक लगातार व्यापारियों से उनका संवाद जारी रहा। किन्तु श्री जेटली के पश्चात् न तो जीएसटी काउंसिल अथवा न ही किसी राज्य की सरकार ने व्यापारियों से कोई सलाह मशवरा किया और मनमाने तरीके से जीएसटी कर प्रणाली में संशोधन कर इसको एक बेहद जटिल कर प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया। 
दोनों व्यापारी नेताओं ने बताया कि जीएसटी की जटिलताओं से आजिज होकर आगामी 11 -12 जनवरी को देश के सभी राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं का एक उच्च स्तरीय ” राष्ट्रीय व्यापारी सम्मेलन ” कानपुर में हो रहा है जिसमें जीएसटी, ई कॉमर्स , नेशनल रिटेल पॉलिसी, ई कॉमर्स पालिसी , व्यापारियों के लिए सरकारी सुविधाओं पर व्यापक चर्चा होगी और एक राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा भी होगी। 

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