जेल भेजने से पहले कैदियों के 5 टेस्ट जरूरी : रिपोर्ट आने तक आरोपी को पुलिस रखेगी हिरासत में, बंदियों के आरोपों से बचने के लिए उठाया कदम लुधियाना :
जेल भेजने से पहले कैदियों के 5 टेस्ट जरूरी : रिपोर्ट आने तक आरोपी को पुलिस रखेगी हिरासत में, बंदियों के आरोपों से बचने के लिए उठाया कदम
लुधियाना : (रवि वर्मा ब्यूरो) :

पंजाब की जेलों में अब कैदियों को ज्यूडिशियली भेजने के नियमों में बदलाव आया है। जेल में बंद कैदियों के स्वास्थ्य को लेकर डीजीपी जेल ने नए आदेश जारी किए है। इन आदेशों में कहा गया है कि किसी भी मामले का आरोपी अब जेल में बिना मैडिकल टेस्ट करवाए नहीं जा सकता। बता दें हालांकि पहले भी जेल में भेजने से पहले आरोपियों का नार्मल मैडिकल टेस्ट होता था लेकिन अब 5 तरह के टेस्ट होना अनिर्वाय हो गए है।
इस आदेश के बाद पुलिस की मुश्किलें बढ़ गईं। पुलिस को आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए अदालत से ट्रांजिट रिमांड पर लेने की जरूरत है। जांच रिपोर्ट आने तक आरोपी पुलिस की हिरासत में रहेगा। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई बार बंदियों की जांच रिपोर्ट देरी से पहुंचती है। ऐसे में उन्हें ट्रांजिट रिमांड बढ़ाने के लिए आवेदन करना पड़ता है, क्योंकि जेल अधिकारी बिना मेडिकल रिपोर्ट के कैदियों को स्वीकार नहीं करते हैं।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी जेल) ने पुलिस को जेल भेजने से पहले एचआईवी, हेपेटाइटिस, यौन संचारित रोग (एसटीडी), तपेदिक (टीबी) और मधुमेह आदि के टेस्ट करवाने के आदेश दिए है। इन मैडिकल टेस्ट में पास होने के बाद ही आरोपी को जेल में दाखिल करवाया जा सकेगा।
लुधियाना सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट शिवराज सिंह नंदगढ़ ने कहा कि कभी-कभी जेल के कैदी दावा करते थे कि वे स्वस्थ और रोग मुक्त होने के बावजूद जेल में बीमार हैं। ऐसे आरोपों से बचने के लिए अधिकारियों ने आरोपियों को जेल भेजने से पहले उनका मेडिकल परीक्षण कराने का फैसला किया है। हालांकि उन्होंने आरोपियों पर कोविड-19 टेस्ट कराने की शर्त को हटा दिया है।
सुपरिंटेंडेंट ने कहा कि यदि कोई आरोपी पहले से उपरोक्त में से किसी भी बीमारी से ग्रसित है तो वे तुरंत अपना इलाज शुरू करें। इससे पहले अप्रैल 2020 में जेल अधिकारियों ने क्षेत्र में कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने से पहले सभी कैदियों का कोविड-19 टेस्ट कराना अनिवार्य कर दिया था।
एक एसएचओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसे रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में पेश किया जाता है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने से पहले वे सिविल अस्पताल से आरोपी का नियमित मेडिकल परीक्षण कराते हैं।
जैसा कि जेल अधिकारियों ने एचआईवी, हेपेटाइटिस, यौन संचारित रोग (एसटीडी), तपेदिक (टीबी) और मधुमेह के लिए अभियुक्तों पर परीक्षण करना अनिवार्य कर दिया है, उन्हें रिपोर्ट आने तक अभियुक्तों को अपनी हिरासत में रखना होगा। इसके लिए उन्हें कोर्ट से आरोपी का ट्रांजिट रिमांड लेना होगा। एसएचओ ने कहा कि यह पुलिस विभाग पर एक अतिरिक्त बोझ है जो पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।

COMMENTS