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कैप्टन ने की बिजली समझौते रद्द करने की सिफारिश :

कैप्टन ने की बिजली समझौते रद्द करने की सिफारिश :

कैप्टन ने की बिजली समझौते रद्द करने की सिफारिश : सुखबीर बादल बोले- रद्द कर दिए तो संकट पैदा होगा, नवजोत सिद्धू के पीछे लगकर ऐसा कदम उठाना ठीक नहीं

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कैप्टन ने की बिजली समझौते रद्द करने की सिफारिश : सुखबीर बादल बोले- रद्द कर दिए तो संकट पैदा होगा, नवजोत सिद्धू के पीछे लगकर ऐसा कदम उठाना ठीक नहीं

लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) : 

पंजाब के मुख्यमंत्री कैपटन अमरिंदर सिंह ने कमेटी की सिफारिश पर बिजली समझौते रद्द करने की सिफारिश कर दी है। इस पर सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि अगर यह समझौते रद्द होते हैं तो बिजली संकट पैदा हो जाएगा। प्रदेश को 5 साल बाद 7000 मैगावाट बिजली की जरूरत पड़ती है। मगर सरकार ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया है। हमने पीपीए के तहत पावर प्लांट लगवाए थे, जिससे 2 रुपए 80 पैसे प्रति यूनिटी बिजली खरीदी जा रही है। अगर बिजली नहीं लेनी है तो प्लांट बंद रहता है और उसके यूजर चार्जेज देने थे। अब इसी पर हल्ला डालकर इसे रद्द किया जा रहा है। जबकि यूजर चार्जेज तो सरकारी प्लांट को भी इससे ज्यादा दिए जा रहे हैं।
कैप्टन सरकार मात्र नवजोत सिंह सिद्धू के पीछे लगकर यह कदम उठा रही है। ट्रांसमिशन लाइन है नहीं और बिजली लेनी कहां से है, किसी को पता नहीं है। ऐसे में अगर समझौते रद्द होते हैं तो पंजाब में बिजली का संकट पैदा हो सकता है। सुखबीर सिंह बादल यहां साहनेवाल विधानसभा क्षेत्र के व्यापारियों से शहर के बड़े होटल में वार्तालाप कर रहे थे और महंगी बिजली के सवाल पर उन्होंने यह जवाब दिया है। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि शिअद की सरकार आने पर एक साल के भीतर पंजाब को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। किसी भी तरह का कोई भी काम करवाने के लिए कार्यालय में नहीं जाना पड़ेगा, हर सरकारी काम ऑनलाइन ही होगा।

बादल के बिजली समझौते, कांग्रेस को पसंद नहीं

शिरोमणि अकाली दल की सरकार के समय पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत थर्मल प्लांट लगाए गए थे। इनमें से एक तलवंडी साबो में और दूसरा गोइंदवाल साहिब में है। इस पर प्रदेश कांग्रेस प्रधान शुरू से ही सवाल उठाते आ रहे हैं और इसे खजाने पर डाका करार दे रहे हैं। हाल ही में गर्मी के सीजन में जब बिजली संकट आया तो पंजाब सरकार ने कमेटी बनाकर इन थर्मल प्लांट से बिजली जरनेट करने वाली कंपनियों का रिव्यू करवाया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सिफारिश की है कि इन समझौतों को रद्द कर देना चाहिए। कहा जा रहा है कि यह थर्मल प्लांट होने के बावजूद सरकार को दूसरी कंपनियों से बिजली खरीदनी पड़ी है।

चुनावी मुद्दा बना है बिजली प्रबंधन

विधानसभा चुनाव 2022 में बिजली एक बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है। क्योंकि इस समय इंडस्ट्री पर सबसे बड़ी मार बिजली की ही पड़ रही है। व्यापारियों ने सुखबीर सिंह बादल से कहा है कि उन्हें दी जा रही बिजली बेहद महंगी है और इसका बिल भरना उनके बस की बात नहीं है। इसलिए सस्ती बिजली का प्रबंध करना होगा। इस पर सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया है कि सरकार आते ही वह उन्हें सस्ती बिजली मुहैया करवाएंगे। कोरोना कॉल में इंडस्ट्री की हुई बरबादी के बाद चुनाव में बिजली समेत इंडस्ट्री के दूसरे मुद्दे जरूर उठाए जा सकते हैं। 

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