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आतंकी से बना पुलिसवाला – नौकरी छोड़ करने लगा गाड़ियां चोरी

आतंकी से बना पुलिसवाला – नौकरी छोड़ करने लगा गाड़ियां चोरी

चोर एक किरदार अनेक : आतंकी से बना पुलिसवाला - नौकरी छोड़ करने लगा गाड़ियां चोरी, अरेस्ट पड़ोसी और साली के बेटे के साथ चुराए पंजाब और दिल्ली से

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चोर एक किरदार अनेक : आतंकी से बना पुलिसवाला – नौकरी छोड़ करने लगा गाड़ियां चोरी, अरेस्ट

पड़ोसी और साली के बेटे के साथ चुराए पंजाब और दिल्ली से कई वाहन

लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :

आतंकवादियों के करीबी रहने बाद पुलिस में भर्ती होकर नौकरी छोड़ने के बाद एक शख्स ने वाहन चोरी का काम शुरू किया। जिसे थाना डेहलों की पुलिस ने साथी समेत गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गुणइंदर सिंह उर्फ गोनी और कबाड़ी धरमिंदर सिंह के रूप में हुई है। उनके कब्जे से 9 वाहन बरामद हुए हैं, जिसमें चार कारें और तीन बाइक हैं।
जिनपर जाली नंबर लगाए गए हैं। जबकि उनके साथी अमृतपाल सिंह और दलविंदर सिंह उर्फ बिक्का दोनों ही फरार हैं। एसएचओ सुखदेव सिंह बराड़ ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि आरोपी गुणइंदर जोकि अपने साथी अमृतपाल और दलविंदर के साथ मिलकर पंजाब और दूसरे राज्यों से गाड़ियां चुराते हैं। वो चोरी की हांडा सिटी से आ रहे हंै। गांव अजनौं‌द के नजदीक नाकाबंदी कर दो आरोपियाें को गिरफ्तार कर लिया।

आतंकियों के साथ दो हत्याएं भी कर चुका है आरोपी गुणइंदर

2 दिन रेकी के बाद तीसरे दिन करते थे गाड़ी चोरी

आरोपी ने बताया कि वो अपने पड़ोसी दलविंदर और साली के बेटे अमृतपाल के साथ रात को घूमते हैं। घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों को दो दिन देखने के बाद तीसरे दिन चोरी कर लेते हैं। अगर कोई ग्राहक मिला तो गाड़ी बेच देते हैं।
लेकिन अगर न बिके तो वो उसे धरमिंदर कबाड़ी के पास ले जाते थे, जोकि गाड़ी को काटकर उसके पार्ट्स अलग कर बेच देता था। पुलिस ने उसकी सूचना पर धरमिंदर को भी काबू कर लिया। वो लुधियाना ही नहीं बल्कि दिल्ली में भी गाड़ियां चोरी कर चुके हैं।
15 से ज्यादा गाड़ियां चोरी करके बेची है। सबसे ज्यादा दलविंदर पर चोरी, डकैती और नशा तस्करी के 17 पर्चे हैं, गुणइंदर पर 7 पर्चे और अमृतपाल पर 3 पर्चे दर्ज है। पुलिस ने तीन दिन के रिमांड पर लिया है।

आतंकियों की सूचना देने वालाें को सरकार ने दी थी पुलिस में नौकरी

पुलिस के मुताबिक गुणइंदर ने बताया कि 1985 से 87 तक वो अमृतसर और तरनतारन के आतंकियों के संपर्क में रहा था। जिसमें आतंकी गुरसेवक सिंह और अन्य शामिल थे। दो साल में उसने दो हत्याएं की और एक हत्या की कोशिश का पर्चा उसके खिलाफ दर्ज हुआ।
इसके बाद पुलिस आतंकियों की इंफ्रोमेशन देने लगा। 1991 में पुलिस की मदद करने वाले अातंकियों को कैट भर्ती करने का फरमान तब पंजाब के मुख्यमंत्री ने किया था। 1992 में गुणइंदर भी भर्ती हो गया। उसके बाद उसके घर पर धमकियां आने लगी तो परिवार के कहने पर 1995 में उसने नौकरी छोड़ दी। फिर वो शराब तस्करी, वाहन चोरी करने लगा।

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