बुधवार से होगा कामकाज : बैंक कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, दो दिन में 30 हजार चैकों की क्लियरेंस अटकी और 500 करोड़ का नुकसान निजीकरण की नीति वापस ले
बुधवार से होगा कामकाज : बैंक कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, दो दिन में 30 हजार चैकों की क्लियरेंस अटकी और 500 करोड़ का नुकसान
निजीकरण की नीति वापस लेने की मांग करते हुए सरकार को फिर से संघर्ष की चेतावनी दी
जालंधर : (पी9 ब्यूरो) :



बैंकों के निजीकरण के विरोध में सरकारी बैंकों की दो दिन की हड़ताल मंगलवार को खत्म हो गई। दूसरे दिन बैंक कर्मचारियों ने शहर में कई जगह प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। बैंकों की 2 दिन की हड़ताल की वजह से 30 हजार चैकों की क्लियरेंस अटक गई जबकि कुल 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। बैंक यूनियन के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर इसके बाद भी केंद्र सरकार ने फैसला नहीं बदला तो फिर आगे के संघर्ष की तैयारी की जाएगी।
बैंकों की 750 शाखाओं के 6 हजार कर्मचारी रहे हड़ताल पर
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन के दो बैंकों के निजीकरण के बयान के विरोध में सोमवार व मंगलवार को शहर में बैंकों की 400 और पूरे जिले में 750 ब्रांचें बंद रहीं। यहां काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर मैनेजर स्तर के अफसर हड़ताल पर रहे। इस दौरान हुए कुल 500 करोड़ के नुकसान में 240 करोड़ कैश व 260 करोड़ चैक के जरिए होने वाला लेन-देन है।
बैंकों का निजीकरण कर्मचारियों के साथ आम जनता के भी हित में नहीं
यूनाइटेड बैंक ऑफ फोरम के कनवीनर कामरेड अमृत लाल ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण कर्मचारियों के साथ आम जनता के हित में भी नहीं है। उन्होंने कहा कि बैंकों के निजीकरण से आम जनता सामाजिक व बैंकिंग जरूरतों की दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकेगी। फिर इन बैंकों में जमा पैसे का फायदा कार्पोरेट घराने अपने फायदे के लिए करेंगे। इस मौके दिनेश डोगरा, संजीव भल्ला, विनय डोगरा, दलजीत कौर, राजेश वर्मा, आरके जौली, विनोद शर्मा, सुनील कपूर, दिलीप कुमार पाठक, पवन बस्सी, एचएस बीर, आरके ठाकुर ने संबोधित किया।

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