उत्तराखंड आपदा : चमोली में ग्लेशियर टूटने से 170 लोगों की मौत की आशंका, तपोवन में एक टनल से 16 को निकाला, दूसरी में 30 अब भी फंसे जिस टनल में लोग
उत्तराखंड आपदा : चमोली में ग्लेशियर टूटने से 170 लोगों की मौत की आशंका, तपोवन में एक टनल से 16 को निकाला, दूसरी में 30 अब भी फंसे
जिस टनल में लोग फंसे हैं, वहां पानी का लेवल बढ़ने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा
प्रभावित इलाकों के एरियल सर्वे के लिए वायुसेना वैज्ञानिकों को एयरलिफ्ट करेगी
देहरादून : (पी9 ब्यूरो) :


उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से बहुत बड़ा हादसा हुआ। चमोली जिले के तपोवन में ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिर गया। इससे बेतहाशा बाढ़ के हालात पैदा हो गए और धौलीगंगा पर बन रहा बांध बह गया। तपोवन में एक प्राइवेट कंपनी के ऋषिगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और सरकारी कंपनी NTPC के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान यहीं हुआ।
हादसे में 170 लोगों के मारे जाने की आशंका है। NTPC प्रोजेक्ट साइट से 10 शव बरामद किए जा चुके थे। यहां दो टनल हैं। ITBP के DG विवेक पांडेय ने बताया कि पहली टनल में फंसे सभी 16 लोगों को निकाल लिया गया है। वहीं, दूसरी टनल से देर रात 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया। कम से कम 30 लोग अब भी वहां फंसे हुए हैं। राज्य के DGP अशोक कुमार ने बताया कि 900 मीटर लंबी इस टनल में पानी बढ़ जाने से रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा।
रविवार देर रात फिर बढ़ा नदियों का जलस्तर
इधर, रविवार की देर रात ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों का जलस्तर दोबारा बढ़ने पर चमोली जिला प्रशासन ने किनारों पर रहने वाले लोगों को अलर्ट किया है। वहीं, वायुसेना प्रभावित इलाकों के एरियल सर्वे के लिए वैज्ञानिकों को एयरलिफ्ट करेगी। ग्लेशियोलॉजिस्ट की दो टीमें भी बाढ़ के कारणों की पड़ताल के लिए तपोवन जाएंगी।
हादसे के बाद 125 लोग लापता
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि हादसे के बाद 125 लोग लापता हैं। ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में ही 4 पुलिसकर्मियों समेत 39 लोग लापता हैं। यहां से 5 किलोमीटर दूर NTPC के प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। यहां 176 मजदूर ड्यूटी के लिए निकले थे। वहीं, ITBP के अनुसार, ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में काम कर रहे 15 से 20 मजदूर लापता हैं। इसके साथ ही NTPC प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 150 मजदूरों की जान जाने की आशंका है।
रात में जारी रहेगा रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद NDRF और ADIRF की टीमें मौके पर पहुंच कर बचाव कार्य कर रही हैं। ITBP के PRO विवेक पांडे के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहेगा। इधर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रावत ने मरने वालों के परिवार को 4 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड से भी 2 लाख रुपए दिए जाएंगे। घायलों को 50 हजार रुपए की मदद दी जाएगी।
गंगा किनारे के इलाकों में दहशत
रविवार सुबह ग्लेशियर टूटने के बाद धौली नदी ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते नदी ने रास्ते में आने वाले हर अवरोध को पाटना शुरू कर दिया। ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट साइट तक पहुंचते-पहुंचते उसने पूरे बांध को ही बहा दिया। मौके पर मौजूद मशीनरी और तमाम लोग इसकी चपेट में आ गए। राहत की बात यह है कि पीपल कोटी से चमोली के बीच में अलकनंदा नदी का जलस्तर तो बढ़ा, लेकिन नदी का क्षेत्र चौड़ा होने से बहाव सामान्य हो गया।
हादसे को देखते हुए प्रशासन ने हरिद्वार तक अलर्ट जारी किया। हादसे के बाद से अलकनंदा और गंगा से किनारे के इलाकों में दहशत है। ऋषिकेश में राफ्टिंग और नावों पर रोक लगा दी गई है। यही नहीं, श्रीनगर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के बांध को भी खाली कर दिया गया है, ताकि पीछे से पानी बढ़ने पर बांध का जलस्तर न बढ़े।
उत्तराखंड की आपदा कब आई, कैसे आई और कितना नुकसान हुआ, 4 पॉइंट में समझें…
1. ऋषिगंगा और धौलीगंगा में जल स्तर बढ़ा
चमोली के तपोवन इलाके में सुबह करीब साढ़े 10 बजे ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा में गिर गया। इससे नदी का जल स्तर बढ़ गया। यही नदी रैणी गांव में जाकर धौलीगंगा से मिलती है इसीलिए उसका जल स्तर भी बढ़ गया। नदियों के किनारे बसे घर बह गए। इसके बाद आसपास के गांवों को खाली कराया गया।
2. ऋषिगंगा और NTPC का प्रोजेक्ट तबाह
ऋषिगंगा नदी के किनारे स्थित रैणी गांव में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पड़ता है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया है। यहां से करीब 15-20 मजदूर लापता हैं। यहीं पर जोशीमठ मलारिया हाईवे पर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन का बनाया ब्रिज भी टूट गया। यहीं पर 6 चरवाहे और उनके मवेशी पानी में बह गए। यहां रेस्क्यू टीमें पहुंच चुकी हैं। ऋषिगंगा का पानी जहां धौलीगंगा से मिलता है, वहां भी जल स्तर बढ़ गया। पानी NTPC प्रोजेक्ट में घुस गया। इस वजह से गांव को जोड़ने वाले दो झूला ब्रिज बह गए। NTPC प्रोजेक्ट में काम करने वाले करीब 150 मजदूरों की जान जाने की आशंका है।
3. रेस्क्यू में लगी आर्मी और एयरफोर्स
SDRF, NDRF, ITBP के अलावा आर्मी ने भी अपने 600 जवान चमोली भेजे हैं। इसके अलावा वायुसेना ने Mi-17 और ध्रुव समेत तीन हेलिकॉप्टर रेस्क्यू मिशन पर भेजे हैं। वायुसेना के C-130 सुपर हरक्यूलस विमान राहत सामग्री लेकर देहरादून पहुंच गए हैं।
4. क्या खतरा अब भी है?
उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक, श्रीनगर, ऋषिकेश और हरिद्वार में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर जा सकता है। उत्तर प्रदेश में गंगा के किनारे बसे शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। बिजनौर, कन्नौज, फतेहगढ़, प्रयागराज, कानपुर, मिर्जापुर, गढ़मुक्तेश्वर, गाजीपुर और वाराणसी जैसे कई जिलों में अधिकारी लगातार नजर रख रहे हैं।
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि वो अफवाहों पर ध्यान न दे। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1905, 1070 और 9557444486 जारी किए हैं। सरकार ने अपील की है कि इस घटना के बारे में पुराने वीडियो सर्कुलेट कर अफवाह न फैलाएं। हरिद्वार में कुंभ मेला चल रहा है और इसलिए वहां अलर्ट जारी किया गया है।



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