सनातन धर्म की अनमोल धरोहर थे प्रधान स्व. श्री अशोक जैन जी : अमन जैन/ऋषि जैन/अनुज मदान स्व. अशोक जैन सिद्धपीठ महाबली संकटमोचन श्री हनुमान मंदिर के
सनातन धर्म की अनमोल धरोहर थे प्रधान स्व. श्री अशोक जैन जी : अमन जैन/ऋषि जैन/अनुज मदान
स्व. अशोक जैन सिद्धपीठ महाबली संकटमोचन श्री हनुमान मंदिर के धर्म कार्य के सदैव प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे, प्रधान स्व. अशोक जैन की पुण्यतिथि आज
लुधियाना : (रवि वर्मा ब्यूरो) :


कहते हैं चौरासी लाख योनियों में गुजरने के उपरांत ही मनुष्य पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लेता है और विरले ही ऐसी महान आत्मा हुई है, जिन्होंने सत्कर्मो और भक्ति मार्ग पर चलते हुए अपने जीवन को पूर्ण साकार किया है तथा आने वाली पीढियों के लिए प्रेरणा स्नेत बने। इनमें सिद्धपीठ महाबली संकटमोचन श्री हनुमान मंदिर, जोशी नगर, हैबोवाल कलां के प्रधान स्व. श्री अशोक जैन जी भी एक थे, जिन्होंने अपनी ताउम्र श्री बाला जी महाराज के चरणों में समर्पित कर दी। सनातन धर्म के प्रचार, प्रसार व श्री बालाजी की भक्ति में जीवन समर्पित करने वाले प्रेरणा स्नेत स्व. श्री अशोक जैन द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर मंदिर में होने वाले प्रत्येक धर्म कार्य पूर्ण किए जाते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर आज प्रात: 8 बजे हवन होगा। उपरांत 9 बजे से 10 बजे तक जैन परिवार में उनकी धर्मपत्नी आशा जैन,मंदिर प्रधान अमन जैन,सपुत्र ऋषि जैन,सेवक अनुज मदान व मंदिर के समस्त अधिकारी, पदाधिकारी पुष्पांजलि द्वारा उनको श्रद्धांजलि देंगे। प्रात: 10 बजे से 11:30 बजे तक उनकी याद में श्री अमृतवाणी का पाठ सम्पन्न होगा।
सपुत्र अमन जैन, प्रधान सिद्धपीठ महाबली संकटमोचन श्री हनुमान मंदिर ने कहा मंदिर की ख्याति आज विश्व भर में फैल चुकी है, जोकि मेरे पापा स्व. अशोक जैन जी की देन है और मंदिर प्रधान होने के नाते वह सदैव अपने कर्तव्य का पालन व मंदिर का हर कार्य उनको प्रेरणा स्त्रोत मान कर निष्ठाभावना के साथ पूर्ण करने का संकल्प लेते है।
सपुत्र सरप्रस्त ऋ षि जैन ने कहा हम अपने पूज्य पिता की समानता नहीं कर सकते परन्तु उनकी छत्रछाया व पदचिन्हों का स्मरण करते हुए धर्म कार्य में सदैव आगे रहकर मजबूती के साथ कार्य करते रहेंगे और मंदिर की मान मर्यादा को सदैव कायम रखेंगे यही हमारा प्रण है।
मुख्य सेवक इंजीनियर अनुज मदान ने अपने अनुभव जताते हुए कहा कि जीवन का सार क्या है और अपने जीवन का सदुपयोग कैसे कर मानवता की सेवा करे अपने धर्म का पालन करें। यह सब मेरे गुरु मेरे पूजनीय प्रधान स्व. अशोक जैन जी से ही मैंने सीखा है और अपने जीवन को धन्य मानता हूं, कि मुझे पिता समान ऐसे गुरु मिले जिन्होंने मेरे जीवन को एक नया लक्ष्य एक नई दिशा दी और उनकी दी शिक्षा पर अमल करना ही मेरा प्रथम धर्म रहेगा।

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