राधा अष्टमी मनाने लाखों श्रद्धालु पहुंचे रहे मथुरा-वृंदावन : राधारानी को प्रकट करने वाला परिवार मानता है उन्हें बेटी, जानिए कैसे पड़ा राधा रानी का ना
राधा अष्टमी मनाने लाखों श्रद्धालु पहुंचे रहे मथुरा-वृंदावन : राधारानी को प्रकट करने वाला परिवार मानता है उन्हें बेटी, जानिए कैसे पड़ा राधा रानी का नाम लाडली
मथुरा : (रवि वर्मा ब्यूरो) :

भगवान श्री कृष्ण कि अति प्रिय राधा रानी का प्रकट उत्सव 23 सितंबर को ब्रज भूमि में धूमधाम से मनाया जायेगा। बरसाना और वृंदावन में धार्मिक कार्यक्रम होंगे। राधा रानी के प्रकट उत्सव में शामिल होने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु ब्रज धाम पहुंचेंगे। लाडली जी को बधाई देंगे। राधा रानी को लाड़ली जी क्यों कहा जाता है और कैसे बरसाना में विराजमान लाडली जी प्रकट हुईं।
बरसाना से 2Km दूर है ऊंचा गांव
बरसाना धाम, जिसे देश-दुनिया में राधा रानी का घर कहा जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। लेकिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं में बहुत ही कम ऐसे होंगे। जो यह जानते हों कि राधा रानी कहां प्रकट हुई और किसने प्रकट किया।
ऊंचा गांव में है राधा रानी के प्रकटकर्ता की समाधि
ऊंचा गांव यहां कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का मंदिर है। यहां भगवान बल्देव अपनी पत्नी माता रेवती के साथ विराजमान हैं। बल्देव जी का यहां विशाल मंदिर देखने को मिमिलता। यहां नारायण भट्ट द्वारा 500 वर्ष पहले प्रगट बलदेव जी और रेवती जी की प्रतिमा स्थापित है। इसी मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित है नारायण भट्ट जी की समाधि।
दक्षिण भारत से ब्रज तलाशने आए नारायण भट्ट
मंदिर में पुजारी बताया कि वह नारायण भट्ट की पीढ़ी के हैं और 17 वें वंशज हैं। घनश्याम गोस्वामी राज भट्ट ने बताया कि उनके पूर्वज नारायण भट्ट का जन्म 1488 में दक्षिण भारत के मदुरई में हुआ। नारायण भट्ट 5 वर्ष की अवस्था में ब्रज को खोजने के लिए निकल पड़े और जब 7 वर्ष के हुए तब ब्रज पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलदेव जी और रेवती जी की प्रतिमा को प्रकट किया। इसके बाद शुरू की ब्रज की तलाश।
नारायण भट्ट के साथ मौजूद गोपाल जी बताते थे ब्रज के स्थल
घनश्याम गोस्वामी ने मंदिर में रखी गोपाल जी की एक प्रतिमा के बारे कहा कि यह कोई साधारण प्रतिमा नहीं है। यह प्रतिमा नारायण भट्ट जब ब्रज आए तो साथ लाए। इन्हीं गोपाल जी ने नारायण भट्ट जी को ब्रज के स्थलों के बारे में बताया। जिससे पता चला कि नंदगांव कहां था, बरसाना कहां था और गोवर्धन कहां था। घनश्याम गोस्वामी का दावा है कि यह प्रतिमा आज भी अपने सच्चे भक्त से बात करती है।
नारायण भट्ट ने प्रगट किया लाड़ली जी को
बल्देव जी की प्रतिमा प्रगट करने के बाद नारायण भट्ट स्वामी ने बरसाना के ब्रहमांचल पर्वत पर से करीब 500 वर्ष पहले राधा रानी की प्रतिमा को प्रगट किया और नाम दिया लाडली जी। यही प्रतिमा आज भी बरसाना के श्री जी मंदिर में विराजमान है जिसका लाखों भक्त दर्शन करते हैं। लाडली जी नाम देने के पीछे वजह थी कि वह उनको बेटी के रूप में मानने लगे। आज भी उनका परिवार राधारानी को बेटी के रूप में मानता है और उनके सभी मनोरथ उसी तरह करता है जैसे बेटी के लिए किए जाते हैं।

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