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मनोज कुमार चौहान ने जिला बाल सुरक्षा अधिकारी पर उठाये सवाल

मनोज कुमार चौहान ने जिला बाल सुरक्षा अधिकारी पर उठाये सवाल

मनोज कुमार चौहान ने जिला बाल सुरक्षा अधिकारी पर उठाये सवाल लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) : भारत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के तह

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मनोज कुमार चौहान ने जिला बाल सुरक्षा अधिकारी पर उठाये सवाल

लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :

भारत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के तहत बने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के सदस्य श्री मनोज कुमार चौहान बाल कल्याण समिति लुधियाना से मिले। उन्होंने पंजाब केसरी में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए बाल कल्याण समिति के चेयरमैन श्री गुरजीत सिंह से गरीबो व पिछड़ी जाति के बच्चों के परिजनों से उनको गलत गाइड करके उनसे एफिडेविट के ज्यादा पैसे वसलूने व हरासमेंट करने के संबंध में बात चीत की। श्री चौहान से जिला बाल संरक्षण अधिकारी व दीपक पर आरोप लगाते हुए कहा कि लुधियाना में पिछले कई महीनों से मुक्त हुए गरीब बाल श्रमिकों व उनके परिवारों से लगातार ऐसी शिकायते उनको मिल रही है, और उन्होंने इस संबंध में प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजी पी श्रीवास्तव को कई बार अवगत कराया लेकिन पंजाब सरकार का महिला व बाल कल्याण विभाग या तो गहरी नींद में सो रहा है या ये सब विभाग के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। श्री मनोज चौहान ने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए कि अभी तक जिला बाल सुरक्षा अधिकारी ने कितने मुक्त बाल श्रमिकों के परिवारों से 800 रुपये के अष्टम बनवाये है, या इसके अलावा भी दलित समाज के लोगो का आर्थिक शोषण किया है। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि जिले में हर जगह बच्चे भीख माँगते या बाल मजदूरी करते आम देखे जा सकते है, लेकिन इनकी रोकथाम हेतु बनाये गए जिला बाल सुरक्षा विभाग को ये नज़र नही आता। श्री चौहान ने कहा कि वे इस मुद्दे को केंद्रीय मंत्री श्री स्मृति जुबिल ईरानी के ध्यान में लाएंगे व दोषियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की सिफारिश करेंगे।

इस संबंध में बच्चों की सुरक्षा के लिए कार्यरत संगठन बचपन बचाओ आंदोलन के दिनेश कुमार से बात करने पर उन्होंने बताया कि बच्चों और उनके परिवारों के हित को ध्यान में रखते हुए DCPO को चाहिए कि जब कोई प्रवासी बच्चा मुक्त हो तुरंत संबंधित जिले या राज्य के DCPO को सूचित कर उनकी सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट व होम वेरिफिकेशन रिपोर्ट एप्रूव कराए, उसके बाद CWC बच्चे को उसके जिले में भेजने की व्यवस्था करवाये, जिससे कि मुक्त बाल श्रमिकों के परिवारों को यहां वहाँ धक्के न खाने पड़े। अष्टाम के सवाल पर दिनेश ने कहा कि ये जाँच का विषय है कि अगर CWC के दफ्तर के पास अष्टाम बन सकते है तो उनको कोर्ट में क्यो भेजा जाता था।

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