खिलाड़ी जोड़ी 59 साल बाद टूटी : फ्लाई सिख मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर ने फोर्टिस में ली अंतिम सांस, पिछले कई दिनों से कोरोना संक्रमण का इलाज चल र
खिलाड़ी जोड़ी 59 साल बाद टूटी : फ्लाई सिख मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर ने फोर्टिस में ली अंतिम सांस, पिछले कई दिनों से कोरोना संक्रमण का इलाज चल रहा था
रविवार देर शाम निर्मल कौर की मौत की खबर परिवार की ओर से दी गई, पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके उड़नसिख
1962 में दोनों खिलाड़ियों ने शादी की थी
चंडीगढ़ : (पी9 ब्यूरो) :
कोरोना संक्रमण की चपेट में आई फ्लाई सिख मिल्खा सिंह की पत्नी 86 साल की निर्मल मिल्खा सिंह ने आखिरकार इलाज के दौरान मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में रविवार शाम को अंतिम सांस ली। चंडीगढ़ के वॉलीबॉल को पहचान देने वाली निर्मल कौर की मौत की खबर पर प्रमुख लोगों ने संवेदना व्यक्त की है। निर्मल कौर को उड़नसिख मिल्खा सिंह की कोरोना संक्रमित की रिपोर्ट के बाद पॉजिटिव आई थी। परिवार की ओर से उनकी मौत की खबर देर शाम को दी गई।
देश के बेस्ट स्पोर्ट्स पावर कपल में से एक मिस्टर एंड मिसेज मिल्खा सिंह की जोड़ी अब टूट गई है। निर्मल मिल्खा सिंह (निर्मल सैनी) का देहांत रविवार शाम 4 बजे हो गया। देश की वूमन वॉलीबॉल टीम को कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट में सफलता दिलाने वाली कप्तान कोरोना की लड़ाई हार गईं। निर्मल कौर पंजाब व चंडीगढ़ की डायरेक्टर स्पोर्ट्स रही हैं। 86 साल की निर्मल ने मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। मिल्खा सिंह के कोविड पॉजिटिव आने के बाद उनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थीं। फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह शाम को हुए पत्नी के दाह संस्कार में शामिल नहीं हो सके क्योंकि वे अभी भी पीजीआई में आईसीयू में हैं। परिवार में बेटे जीव मिल्खा सिंह समेत तीन बेटियां हैं।
पावर कपल में से एक थे मिस्टर एंड मिसेज मिल्खा सिंह
फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह और निर्मल कौर देश के बेस्ट और टॉप पावर कपल में से एक माने जाते हैं। अपने समय के सर्वश्रेष्ठ 400 मीटर एथलीट मिल्खा सिंह ने इंडियन विमन वॉलीबॉल टीम की कप्तान निर्मल सैनी के साथ शादी की। 1957 में दोनों इंडो-सीलोन स्पोर्ट्स मीट के दौरान एक दूसरे के साथ मिले थे। 1961 में निर्मल ने पंजाब स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट जॉइंट किया और तब वे असिस्टेंट डायरेक्टर बनी थीं। एक साल बाद 1962 में दोनों ने शादी की।
सेक्टर-7, 46 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोर्ट बनवाए थे
विजय पाल सिंह, वाइस प्रेसिडेंट (वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया), एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट(चंडीगढ़ वॉलीबॉल एसोसिएशन) ने बताया कि निर्मल कौर सिर्फ भारतीय वॉलीबॉल टीम की कप्तान ही नहीं थीं बल्कि एक रोल मॉडल थीं। उन्होंने हमेशा अपने गेम से प्यार किया और उसे आगे लेकर जाने का प्रयास किया। चंडीगढ़ के वॉलीबॉल को पहचान दिलाने का क्रेडिट हमेशा उनके ही नाम रहेगा। 1985-86 में वे चंडीगढ़ स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट की जॉइंट डायरेक्टर थीं तो उन्होंने यहां पर पहली बार जूनियर नेशनल चैंपियनशिप कराई। ये पहला मौका था जब चंडीगढ़ ने इतनी बड़ी मेजबानी की थी। इसके बाद स्कूल नेशनल और पुलिस गेम्स कराने का क्रेडिट भी उन्हें ही है। वे बाद में चंडीगढ़ की स्पोर्ट्स डायरेक्टर भी रहीं और उन्होंने हॉकी एस्ट्रोटर्फ से लेकर कई अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करवाए। 1987 में वे चंडीगढ़ वॉलीबॉल एसोसिएशन की प्रेसिडेंट चुनी गईं और गेम के लिए काम किया। सिटी में वॉलीबॉल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेवल देने का क्रेडिट उन्हें ही जाता है। सेक्टर-7 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स हाे या फिर सेक्टर-46 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स दोनों जगहों पर उन्होंने ही वॉलीबॉल कोर्ट बनवाए थे। पुलिस लाइन में बने कोर्ट भी उन्हीं ने तैयार कराए। वे अभी भी चंडीगढ़ वॉलीबॉल एसोसिएशन की चीफ पैटर्न थीं। उनका जाना चंडीगढ़ वॉलीबॉल के साथ साथ इंडियन वॉलीबॉल और इंडियन स्पोर्ट्स के लिए दुख भरा है।

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