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निगम बजट आज : जनता से वसूले 1872 करोड़

बजट के अलावा केंद्र-राज्य की 320 करोड़ ग्रांट से 266 करोड़ ही खर्च पाए

निगम बजट आज : जनता से वसूले 1872 करोड़

निगम बजट आज : जनता से वसूले 1872 करोड़, विकास पर खर्चे 19.5%, वेतन, बिल और कर्ज चुकाने में चले गए 1500 करोड़ बजट के अलावा केंद्र-राज्य की 320 करोड

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निगम बजट आज : जनता से वसूले 1872 करोड़, विकास पर खर्चे 19.5%, वेतन, बिल और कर्ज चुकाने में चले गए 1500 करोड़

बजट के अलावा केंद्र-राज्य की 320 करोड़ ग्रांट से 266 करोड़ ही खर्च पाए

सबसे कम 11.19 %विकास कोरोना काल में, पिछले साल से 15%कम

लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :

निगम के साल 2018-19 से लेकर जनवरी 2020-21 के दरमियान करीब तीन सालों के वार्षिक बजट व एक्सपेंडेचर के लेखा-जोखा को देखने पर पता चला है कि तीन सालों में पब्लिक से जितना टैक्स वसूल किया उसमें से मात्र 19.5 फीसदी ही विकास के नाम पर खर्च हुआ।

1872.39 करोड़ रुपये तीन साल में विभिन्न 14 क्षेत्रों में टैक्स के तौर पर वसूल किए गए, जिसमें से कुल 363.44 करोड़ रुपये विकास पर खर्च हुए। इसमें सबसे कम वित्तीय वर्ष 2020-21 में 31 जनवरी तक मात्र 11.19 फीसदी यानी 65 करोड़ ही विकास पर लगे। मगर केंद्र व राज्य सरकार से अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर इंप्रूवमेंट प्रोग्राम व फाइनांस कमीशन से मिले करीब 320 करोड़ रुपए में से 266 करोड़ विकास पर अलग से खर्च किए, लेकिन इसमें से भी 54 करोड़ रुपए तो खर्च ही नहीं कर पाए।

आउटर व स्लम एरिया के लिए रखा गया बजट ही 80 फीसदी खर्च हो पाया, मगर रिपेयर के लिए रखे बजट में से एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। नई सड़कों के लिए निगम ने तीन साल के बजट में 158 करोड़ खर्च का लक्ष्य रखा, मगर इसमे से 2018 में 45.39 करोड़, 2019 में 50.45 करोड़ व 2020-21 में जनवरी तक 42 करोड़ ही खर्चा। स्ट्रीट लाइट पर तीन साल में करीब 21.9 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें 2018 में 8.88 करोड़, 2019 में 5.85 करोड़ रुपए खर्च हुए।

पार्कों पर 21.32 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें से 2018 में 6.84 करोड़ रुपए व 2019 में 6.44 करोड़ रुपये खर्च हुए। तीन साल के निगम बजट व खर्च को देखने से पता चलता है कि पिछले तीन साल में सबसे कम विकास 2020-21 में हुआ। 2018 में विकास पर 20.01 फीसदी व 2019 में बजट का 26.82 फीसदी विकास पर खर्च हुआ। मगर यह वित्तीय वर्ष में जनवरी 2021 तक मात्र 11.19 फीसदी तक सिमट गया जो राज्य व केंद्र से मिली ग्रांट से अलग है। (जनवरी 2021 तक के आंकड़ों पर आधारित)

ग्राउंड रियलिटी : अब निगम की ओर से खर्च हुई राशि की हकीकत भी देखिए
सड़को पर 

140 करोड़ खर्चे, 15 के सैंपल फेल हुए, न वसूली न कार्रवाई

निगम ने सड़कों की नई डेवलपमेंट के अलावा रिपेयर-मेंटीनेंस के नाम पर 140 करोड़ रुपए पिछले तीन सालों में खर्च कर दिए हैं। लेकिन हालात ये देखने को मिले हैं 15 नई सड़कों के निर्माण कार्य क्वालिटी कंट्रोल टीम ने जांच में फेल साबित कर दिए हैं। इसमें न कोई कार्रवाई की गई न ही रिकवरी करवाई गई। रिपेयर-मेंटीनेंस के नाम पर पैचवर्क हर बारिश के बाद उखड़ जाते हैं, जिसकी जांच तक नहीं करवाई जा रही।

पार्को पर  
21.32 करोड़ खर्चे, 37 पार्कों पर कब्जे नहीं छुड़वा पाए

शहर के पार्कों के नाम पर नगर निगम ने नई डेवलपमेंट से लेकर रिपेयर और मेंटीनेंस पर तीन सालों में 21.32 करोड़ रुपए खर्च कर डाले हैं। इतने पैसे खर्च करने के बाद भी हकीकत ये सामने आई कि नगर निगम के ही 37 पार्कों में अवैध कब्जे किए हुए हैं, जिसे तीन सालों में निगम अफसर छुड़वा भी नहीं पाए, जबकि कुछ पार्कों की हालत तो बहुत ही बुरी है।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
49.82 करोड़ खर्चे, कंपनी काम छोड़ भागी, प्लांट ठप

सॉलिड वेस्ट के नाम पर तीन सालों में 49.82 करोड़ खर्च किए गए हैं। बावजूद इसके स्वच्छता रैंकिंग में कुल स्कोर में से सिर्फ 50 से 55 फीसदी के बीच में ही काम कर पाए हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम देखने वाली कंपनी एटूजेड से अनुबंध टूट चुका है, नया टेंडर नहीं लग पाया। प्लांट एक माह से ठप है, जिससे रोजाना 1100 टन कचरा डंप हो रहा है।

पानी सीवरेज : नहरी पानी को 1247 करोड़ मंजूर, जमीन एक्वायर नहीं हुई 

शहर को जमीनी पानी की जगह नहरी पानी मुहैया कराने के लिए विश्व बैंक से मिलकर प्रोजेक्ट मंजूर करवाया। राज्य सरकार ने बजट में 1247 करोड़ रुपए भी मंजूर कर दिए। मगर निगम जमीन ही एक्वायर नहीं कर पाया, जबकि 3 सालों में 4 करोड़ रुपए का बजट इसी काम के लिए उपलब्ध था।

आउटर एरिया डेवलपमेंट : कमेटी बने साल बीता, आउटर एरिया ही निर्धारित नहीं हुआ

आउटर वाॅर्डों में सड़क-सीवरेज और वाॅटर सप्लाई लाइन की नई डेवलपमेंट से लेकर पुरानी को दुरुस्त करने के लिए अभी तक बिल्डिंग ब्रांच सर्वे करके ये तय नहीं कर पाया कि सही में आउटर एरिया कौन सा है और कहां पर डेवलपमेंट की जरूरत है। कमेटी को बने एक साल बीत चुका है।

सीधी बात बलकार सिंह संधू मेयर से 

क्वालिटी कंट्रोल टीम दोबारा बनाई
सड़कें उखड़ रही हैं, पैचवर्क टिकते नहीं, घोटालों पर कोई एक्शन क्यों नहीं?

-नई सड़क, पैचवर्क अब रोड कटर मशीन से बनेंगे, बार-बार टूटने की समस्या खत्म होगी, क्वालिटी कंट्रोल टीम को दोबारा स्टैंड कर दिया है।

पार्कों पर कब्जे क्यों नहीं हटाए?

-कब्जे हटाने को आदेश जारी किए हैं।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट आज तक ठीक क्यों नहीं हो पाया?

-हम तीन टेंडर कलेक्शन, लिफ्टिंग और प्रोसेसिंग के और ताजपुर डंप का कूड़ा खत्म करने को भी स्मार्ट सिटी के तहत टेंडर लगाने जा रहा हैं।

स्ट्रीट लाइटें बंद रहने की समस्या हर समय रहती है?

-हमने स्मार्ट सिटी के तहत करीब 19 करोड़ रुपए और मंजूर करवाए हैं, जिससे बंद लाइटों की समस्या हल होगी।

आउटर एरिया की डेवलपमेंट के लिए क्या करेंगे?

-हमने सभी पार्षदों को पूरे कामों के एस्टीमेट बनाने को कहा है।

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