सिद्धू ने लुधियाना में वर्करों के साथ की बैठक : लुधियाना में पार्षदों-वार्ड इंचार्ज से मीटिंग के बाद व्यापारियों से भी करेंगे मुलाकात लुधियाना :
सिद्धू ने लुधियाना में वर्करों के साथ की बैठक : लुधियाना में पार्षदों-वार्ड इंचार्ज से मीटिंग के बाद व्यापारियों से भी करेंगे मुलाकात
लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू चार महीने बाद सीधे तौर पर वर्करों से जुडे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू सर्किट हाउस में बैठक की, उस समय उनके साथ कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु, मेयर बलकार सिंह संधू और विधायक संजय तलवाड़, सुरिंदर डावर मौजूद रहे। बैठक में लुधियाना के 95 पार्षद और वार्ड इंचार्ज को बुलाया गया।
सिद्धू इस बैठक में उनके साथ लुधियाना की विधानसभा सीटों के बारे में विमर्श किया। वह पार्षदों से वार्ड इंचार्जों के साथ मीटिंग के दौरान फीडबैक लेने के साथ वार्ड स्तर पर पार्टी की विचारधारा और घोषणाओं को पहुंचाने के लिए दिशा निर्देश दिए। सर्किट हाउस में मीटिंग के बाद शहर के कुछ इंडस्ट्रिलिस्टों से भी मुलाकात करेंगे।
प्रधान बनने के बाद निचले स्तर की पहली मीटिंग
नवजोत सिंह सिद्धू को जुलाई में कांग्रेस का अध्यक्ष लगाया गया था। इसके बाद से उनका पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और बाद में चरणजीत सिंह चन्नी सरकार से टकराव चल रहा है। एडवोकेट जरनल हटाने को लेकर उनकी ओर से इस्तीफा दे दिया गया था। मगर अब जब नए एडवोकेट जरनल लगा दिए गए हैं तो वह दोबारा से सक्रिय हो गए हैं और पहली बार किसी क्षेत्र में जाकर निचले स्तर के कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं।
सांसद बिट्टू ने दी थी फील्ड में उतरने की सलाह
लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने पिछले दिनों पीपीसीसी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को सरकार के साथ टकराव छोड़ने की सलाह दी थी। साथ ही अपने कार्य के अनुसार फील्ड में जाकर संगठन को मजबूत करने के लिए भी कहा था। इसके बाद सिद्धू जब सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के साथ लुधियाना दौरे पर आए तो दोनों के बीच काफी नजदीकी भी दिखी। दोनों ने मंच पर एकजुटता दिखाने का भी प्रयास किया।
कोटकपूरा में वर्करों के समारोह में नहीं जाएंगे
मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कोटकपूरा में वर्करों से मुलाकात करेंगे। नवजोत सिंह सिद्धू इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचेंगे। इससे पहले सिद्धू लुधियाना और मोगा में सीएम चन्नी के साथ मंच शेयर कर चुके हैं और दोनों बार सरकार के खिलाफ ही बयान दिए हैं। इसलिए शायद कांग्रेस हाईकमान ने फैसला लिया है कि वह सरकार से अलग होकर अपनी सभाएं करेंगे। सिद्धू के कोटकपूरा नहीं जाने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है।

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