HomeHeath

संत तुलसी दास जी की 56वी बरसी बड़ी श्रद्धा से मनाई गई : भगत संजीव

संत तुलसी दास जी की 56वी बरसी बड़ी श्रद्धा से मनाई गई : भगत संजीव

संत तुलसी दास जी की 56वी बरसी बड़ी श्रद्धा से मनाई गई : भगत संजीव  लुधियाना : 19 नवंबर : (पी9 ब्यूरो) : भगत संजीव जी बाबा जी की मूर्ति को इशनान

पंजाब के नए सीएम का शपथ ग्रहण समारोह :
शिअद की ‘पंजाब दी गल’ : फोकस हिंदू और व्यापारियों पर……
भगवान वाल्मीकि जी का जन्म उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया : दीपक मिट्ठू

संत तुलसी दास जी की 56वी बरसी बड़ी श्रद्धा से मनाई गई : भगत संजीव 

लुधियाना : 19 नवंबर : (पी9 ब्यूरो) :

भगत संजीव जी बाबा जी की मूर्ति को इशनान करवाने के बाद दोशाला पहनाते हुए  
मंदिर सिद्ध बाबा बालक नाथ में भगत संजीव जी भगतो को प्रवचन सुना गुरु की महिमा बताते हुए
मंदिर सिद्ध बाबा बालक नाथ तथा दुर्गा माता में संगते कीर्तन रस श्रवण करती हुए

मंदिर सिद्ध बाबा बालक नाथ तथा दुर्गा माता प्रेम नगर घुमार मंडी लुधियाना में भगत संजीव जी के दादा गुरु एवं भगत तरसेम लाल जी के पूज्य गुरु संत तुलसी दास जी 56वी बरसी बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई गई। भगत संजीव जी द्वारा सुबह चार बजे बाबा जी की मूर्ति को इशनान करवाया गया। उसके बाद बाबा जी के झंडे की रसम सात बजे झंडा लहराकर मनाई गई।  भगत संजीव ने गुरु की महिमा बताते हुए कहा गुरुब्रह्मा गुरुविर्ष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः। गुरु तो माता,पिता,आचार्य और अतिथि होते हैं। उनकी सेवा करनी, उनसे विद्या, शिक्षा लेनी-देनी शिष्य और गुरु का काम है। गुरु की व्युत्पति करते हुए कहा गया है- गारयति ज्ञानम् इति गुरुः। गुरु उसे कहते हैं जो ज्ञान का घूंट पिलाये। ज्ञान का मानव जाति के लिए जो महत्व है उसे बतलाने की आवश्यकता नहीं। इसीलिए ज्ञान का वितरण करने वाले का भी मनुष्य जाति मात्र के लिए अति महत्व है।ज्ञान दो प्रकार के होते हैं- एक तो स्वयं प्रकाश्य अर्थात अपने आप पैदा होने वाला और दूसरा परतः प्रकाश्य अर्थात दूसरों के द्वारा प्राप्त होने वाला । परतः प्रकाश्य ज्ञान तो सीधे गुरु के द्वारा ही प्राप्त होता है लेकिन स्वयं प्रकाश्य ज्ञान में भी गुरु उस ज्ञान को इंगित करके शिष्य की बुद्धि को ज्ञान की दिशा में प्रवाहित कर देता है, जिससे स्वयं साधक अपने लक्ष्य का आभाष पाकर उसे ही प्राप्त करने में तन-मन-धन से जुट जाता है और फिर अंततः अपनी साधना में सफल होता है । सुबह नौ बजे से श्री तरसेम भजन मण्डली की तरफ से भजन कीर्तन किया गया। जिसमे दूर दूर से  भगत जनो ने भाग लिया। दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक संगतो के लिए लिए अटूट लंगर बरपाया गया। बाहर से आई हुई संगतो के लिए रहने एवं रोटी का प्रबंध भगत संजीव जी की तरफ से विशेष तौर पर किया गया। संत तुलसी दास जी की याद में करवाए गए इस कार्यक्रम में दूर दूर से आई हुई संगतो ने हाजरी लगा अपना जीवन धन्य किया। 

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS: 2