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भगवान वाल्मीकि जी का भारतीय संस्कृति में महान स्थान : कुलवंत सिद्धू

भगवान वाल्मीकि जी का भारतीय संस्कृति में महान स्थान : कुलवंत सिद्धू

भगवान वाल्मीकि जी का भारतीय संस्कृति में महान स्थान : कुलवंत सिद्धू  कुलवंत सिद्धू ने वाल्मीकि तीर्थ के लिए रवाना की बसें लुधियाना, 17 अक्टूबर

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भगवान वाल्मीकि जी का भारतीय संस्कृति में महान स्थान : कुलवंत सिद्धू 

कुलवंत सिद्धू ने वाल्मीकि तीर्थ के लिए रवाना की बसें

लुधियाना, 17 अक्टूबर (पी9 ब्यूरो) :

कुलवंत सिंह सिद्धू ,सरताज सिंह सिद्धू, जगदीप सिंह रिंकू, हरबिंदर सिंह सोखी, चहल सिंह धीमान, राजिंदर कपूर, भूपिंदर पटियाला, बाबा बिश्ना आदि की हाजरी में बसों का काफला अमृतसर रवाना करते हुए 

जहां पूरे विश्व में भगवान वाल्मीक जी का प्रकट दिवस पवित्र दिन भक्ति श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।  कुलवंत सिंह सिद्धू, आम आदमी पार्टी, हलका आत्म नगर इंचार्ज, लुधियाना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर पर हो रहे समागम में बड़ी संख्या में बसों में सवार होकर वाल्मीकि तीर्थ के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर सरताज सिंह सिद्धू, जगदीप सिंह रिंकू, हरबिंदर सिंह सोखी, चहल सिंह धीमान, राजिंदर कपूर, भूपिंदर पटियाला, सोमपाल सूद, गोविंद कुमार, जॉनी बिडलान, इंदरमोहन, जगतार सिंह, रविंदर बॉबी, राजिंदर सिंह खुर्मा, राजेश नाहर, अमन कंडेरा, रंजीत बिडलान, सेठी चौहान, मनोज टांक, मंगलनाथ बाली, इंद्रजीत चोपड़ा, बाबा बिश्ना आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर बोलते हुए कुलवंत सिद्धू ने कहा कि भगवान वाल्मीकि का भारत की संस्कृति में महान स्थान है, भगवान वाल्मीकि ने श्री रामायण की रचना की और हमें न केवल एक महान धार्मिक ग्रंथ बल्कि जीवन जीने का मूल मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारे सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथ हमें एकता का संदेश देते हैं, उच्च और निम्न के बीच के भेदभाव को भी खत्म करते हैं लेकिन हमारे देश के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि कुछ संकीर्ण दिमाग वाले लोग हमें धर्मों और जातियों में बांट रहे हैं। जब ईश्वर एक है, उसकी बनाई रचना एक है, मनुष्य के आने-जाने का चक्र एक ही है, तो समाज को जातियों में बांटकर ऊंच-नीच का निर्णय करने वाले हम कौन होते हैं। तो आइए हम भगवान वाल्मीकि के पावन दिवस पर समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लें, सभी धर्मों का सम्मान करें और एक स्वस्थ समाज का निर्माण करें जो हमें हमारे पवित्र शास्त्र सिखाए, उनका पालन करें।

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