HomeHeath

बेकाबू कोरोना : न शव ढोने को एंबुलेंस, न चिताएं जलाने को जगह

बेकाबू कोरोना : न शव ढोने को एंबुलेंस, न चिताएं जलाने को जगह

बेकाबू कोरोना : न शव ढोने को एंबुलेंस, न चिताएं जलाने को जगह, प्रशासन सभी श्मशान खोल बोला- कोई मना करे तो दीवार तोड़ दो मृतकों की रिकॉर्ड संख्

ओएनडीसी नेटवर्क ई-कॉमर्स कंपनियों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए होगा : हरकेश मित्तल अध्यक्ष कैट पंजाब
सरकार ने प्रोफेशनल टैक्स खत्म न किया तो व्यापारी करेंगे महा आंदोलन : सुनील मेहरा
विहिप नेता अनिल अरोड़ा जीरकपुर से गिरफ्तार

बेकाबू कोरोना : न शव ढोने को एंबुलेंस, न चिताएं जलाने को जगह, प्रशासन सभी श्मशान खोल बोला- कोई मना करे तो दीवार तोड़ दो

मृतकों की रिकॉर्ड संख्या के साथ भयावह तस्वीरें आने लगीं सामने

लुधियाना : (हरपाल सिंह) :

लुधियाना में संवेदनहीनता की हद उस समय पार हो गई जब सरकारी अस्पताल से लोग एंबुलेंस न मिलने से शवों को ऑटो रिक्शा और रेहड़ियों में ढोकर श्मशान ले जाते नजर आए।

काेराेना का बढ़ता संक्रमण और मौतों के आंकड़े डराने लगे हैं। लुधियाना, जालंधर, बठिंडा और अन्य शहरों से विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आने लगी हैं। हालात यह हैं कि शवों को श्मशनघाट तक ले जाने वाले वाहन और चिताओं के लिए जगह कम पड़ रही है। सोमवार को लुधियाना में संवेदनहीनता की हद उस समय पार हो गई जब सरकारी अस्पताल से लोग एंबुलेंस न मिलने से शवों को ऑटो रिक्शा और रेहड़ियों में ढोकर श्मशान ले जाते नजर आए। श्मशान में भी तीन दिन से लगातार 21 से 29 शव तक एक साथ जलाने पड़ रहे हैं, जिससे पहले की चिताएं अभी ठंड़ी भी नहीं होती, और शव आ जाते हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने सोमवार को शहर के तमाम श्मशानघाट को कोरोना शवों के संस्कार के लिए खोलने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अगर कोई श्मशान या कब्रिस्तान संस्कार करने से मना करे तो बाउंड्री वॉल और गेट भी तोड़ दिए जाएं। हालात इस कदर बेकाबू हैं कि अब संक्रमित मरीज को अंतिम यात्रा तक पहुंचाने को न स्टाफ है न एंबुलेंस। प्राइवेट एंबुलेंस को 2500 से 3 हजार देने के असमर्थ गरीब परिवार ऑटो व रेहडों पर शव ढो रहे हैं।

ऑटो रिक्शा में पति का शव ले पहुंची पत्नी जीवन नगर निवासी भगवान शाह (67) की रविवार शाम 4 बजे कोरोना से मौत हुई। परिजनों ने शव लेजाने को एंबुलेंस मांगी तो कहा गया शाम को मिलेगी या खुद इंतजाम कर लो। 2500 प्राइवेट एंबुलेंस को दे नहीं सकते थे मजबूरन पत्नी खुद ही पति के शव को बिना पीपीई किट के ऑटो में अंतिम संस्कार के लिए श्मशान लेकर आई।

रेहड़े पर लानी पड़ी मां की अर्थी इस्लामगंज निवासी कांता देवी (55) की अर्थी उस रेहड़े में पहुंची, जिसमें सिविल अस्पताल से अज्ञात मृतकों की लाश को लाया जाता है। रविवार दोपहर 1 बजे कोरोना से उनकी मौत हो गई थी। लेकिन उन्हें 24 घंटे बाद सोमवार को भी एंबुलेंस नहीं मिली। परिजनों को मजबूरन उनका शव रेहड़े पर ही श्मशान लेजाना पड़ा।

दुर्भाग्यपूर्ण हैं ऐसी घटनाएं : डीसी

आज जो घटना हुई है वो दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने इंक्वायरी मार्क कर दी है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। अंतिम संस्कार केे लिए हमने कमेटी भी गठित की है। संक्रमित के संपर्क में आए सभी की कांटेक्ट ट्रेसिंग कर सैंपल लिए जाएंगे।
– वरिंदर शर्मा, डिप्टी कमिश्नर लुधियाना

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS: 0