फर्जी जमानत का खेल : एप से खसरा नंबर ले बनवाते फर्द, मोबाइल पर आधार कार्ड बना फर्जी दस्तावेज तैयार कर 400 की दे चुके जमानत, तीन साल से थे सक्रिय, 32
फर्जी जमानत का खेल : एप से खसरा नंबर ले बनवाते फर्द, मोबाइल पर आधार कार्ड बना फर्जी दस्तावेज तैयार कर 400 की दे चुके जमानत, तीन साल से थे सक्रिय, 32 आधार कार्ड, 12 फर्द और एक वोटर कार्ड बरामद
9 ठग काबू, आरोपियों में वकीलों के तीन मुंशी भी
आरोपियों के फोन से मिले जमानत लेने वालों के नंबर
लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :

कोर्ट कांप्लेक्स में पंजाब सरकार की सरकारी एप से ठगों द्वारा एरिया के मुताबिक कोई भी खसरा नंबर निकाल उस जमीन की फर्द ले लेते थे। उसके बाद जमीन के मालिक का नाम व एड्रेस लेकर मोबाइल में फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उस पर अपने साथियों की फोटो लगा दी जाती थी। जिसके बाद ठगों द्वारा उसी फर्द व आधार कार्ड के आधार पर कोर्ट में फर्जी जमानत देकर कुख्यात अपराधियों की जमानतें दे दी गई। यहां तक कि वह अपराधी रिहा भी हो गए।
इस तरह ठगी मारने वाले वकीलों के तीन मुंशी, एक भाई समेत 9 लोगों को सीआईए-3 की टीम ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 32 आधार कार्ड, 12 फर्द व एक वोटर कार्ड बरामद किया गया है। आरोपियों की ओर से तीन साल में 400 ज्यादा लोगों की जमानतें करा चुके हैं।
दो आरोपियों पर दर्ज हैं दो मामले
थाना डिवीजन पांच पुलिस ने भोला कॉलोनी के राजिंदर सूद उर्फ बिट्टू, मोहल्ला गोबिंदसर के मनदीप उर्फ मग्गा, सत्गुरु नगर के भूपिंदर उर्फ गांधी, न्यू अबादी फगवाड़ा के बब्बर मैक उर्फ नूर, गांव माजरी के रविंदर उर्फ रवि, टेढ़ी रोड के भूपिंदर उर्फ रिंकू, धांधरा एन्क्लेव के गुरप्रीत उर्फ लंबू, मनप्रीत और जवाहर नगर कैंप के विजय उर्फ लक्की पर पर्चा दर्ज किया है। इनमें राजिंदर, मनदीप और गुरप्रीत लुधियाना कोर्ट कॉम्प्लेक्स में प्रेक्टिस करने वाले वकीलों के मुंशी हैं। राजिंदर व मनदीप पर फर्जी जमानत देने के दो मामले दर्ज हैं। डीसीपी सिमरपाल सिंह ढ़ीडसा, एडीसीपी रूपिंदर कौर, एसएचओ यशपाल शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी।
हत्या, लूट और तस्करी के मामलों में दे चुके हैं जमानत
आरोपियों ने हत्या, स्नेचिंग, चोरी व ड्रग स्मगलिंग के मामलों में वाॅन्टेड आरोपियों की जमानतें दे चुके हैं। हालांकि इनमें तकरीबन सभी आरोपी रिहा भी हो चुके हैं। आरोपियों की ओर कोर्ट में घूमकर जमानतें देने के लिए ग्राहक ढूंढ़े जाते थे। लेकिन फिर उन्होंने अपना धंधा ऐसा फैलाया कि मोबाइल पर ही फर्जी जमानत देने के ऑर्डर बुक किए जाते थे। आरोपियों को जमानत के लिए केस व तारीख बता दी जाती थी। तय समय पर वह फर्जी कागजों के साथ जमानती भेजकर पैसे ले लेते थे।
पैसे कमाने के लालच ने मिलाया साथ
पुलिस को आरोपियों के पास से कई लोगों के और भी दस्तावेज मिले हैं। उनके मोबाइल में जमानतें लेने वाले लोगों की भी जानकारी मिली है। आरोपियों के रोजाना आधार कार्ड का रंगीन प्रिंट निकालकर देने वाले दुकानदार की भी पुलिस तलाश कर रही है। आरोपियों में से एक आरोपी मनप्रीत सिंह दूसरे आरोपी मुंशी गुरप्रीत सिंह का सगा भाई है। आरोपियों की ओर से कोर्ट में आने वाले लोगों को पैसा कमाने का लालच देकर अपने साथ मिला लिया जाता था।
एक जमानत के 10 हजार रुपए तक लेते थे
तीनों मुंशी की ओर से बाकी के छह आरोपियों को जमानत देने के लिए रखा हुआ था। वे खुद दस्तावेजी काम करते थे और जमानत के लिए उन्हें भेजा जाता था। आरोपी एक जमानत का एक से 10 हजार रुपए तक लेते थे। बड़े मामलों में बड़ी रकम ली जाती थी। इसी तरह कर आरोपी लोगों से लाखों रुपए ऐंठ चुके हैं।
खुद को मालिक बता निकलवाते फर्द
सब इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह ने बताया कि आरोपियों ने राज्य सरकार की पंजाब लैंड रिकाॅर्ड एप डाउनलोड कर रखी थी। फिर अंदाजे से उसमें खसरा नंबर भरकर जमीन सर्च करते थे। जब कोई भी जमीन की जानकारी निकलती तो आरोपी सेवा केंद्र में उक्त जमीन का खुद को मालिक बताकर फर्द लेने के लिए अप्लाई कर देते थे। इसके बाद उसकी फर्द निकलवा लेते थे। आरोपियों द्वारा बड़े मामलों में जमानत देने के चलते शहर की जमीनों की ही फर्द निकाली जाती थी। क्योंकि उनकी कीमत ज्यादा रहती थी।
इंटरनेट से सीखा आधार कार्ड बनाना
एसएचओ यशपाल शर्मा ने बताया कि आरोपी मनदीप, गुरप्रीत और राजिंदर फर्द के आधार पर एप के जरिए मोबाइल पर आधार कार्ड बना लेते थे। जिसमें फर्द मालिक का नाम व एड्रेस लिखकर फोटो अपने साथी की लगा देते। आरोपियों नेे पहले इंटरनेट पर आधार कार्ड बनाना सीखा। इसके बाद उसी के मुताबिक तैयार कर प्रिंट निकला लेते थे।

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