कोटकपूरा फायरिंग केस : पूर्व डीजीपी, आईजी समेत कई पुलिस अफसरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द, आईजी कुंवर के नेतृत्व वाली एसआईटी की भंग हाईकोर्ट का

कोटकपूरा फायरिंग केस : पूर्व डीजीपी, आईजी समेत कई पुलिस अफसरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द, आईजी कुंवर के नेतृत्व वाली एसआईटी की भंग
हाईकोर्ट का सरकार को नई एसआईटी बनाने का आदेश
लुधियाना : (हरपाल सिंह चीना) :
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बहुचर्चित कोटकपूरा गोलीकांड मामले में दर्ज की गई एफआईआर व उसमें राज्य सरकार की तरफ से गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट को रद्द कर नई एसआईटी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को एसआईटी इंचार्ज कुंवर विजय प्रताप सिंह को नई एसआईटी से बाहर रखने को कहा है। देर शाम पौने छह बजे तक चली बहस के बाद यह निर्देश जस्टिस राजबीर सेहरावत ने दिए। कोटकपूरा फायरिंग केस में दर्ज एफआईआर में इरादा कत्ल के आरोप में तत्कालीन एसएचओ गुरदीप सिंह पंधेर, डीजीपी सुमेध सिंह सैणी, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, एसपी विक्रमजीत सिंह समेत करीब 50 से ज्यादा पुलिस
कर्मचारियों को नामजद कर एसआईटी ने चालान पेश किया था। तत्कालीन एसएचओ गुरदीप सिंह पंधेर व अन्य पुलिस कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि एसआईटी में शामिल आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह को मामले से अलग किया जाए और 7 अगस्त 2018 को दर्ज एफआईआर खारिज किया जाए। क्योंकि, इस केस में 14 अक्टूबर 2015 को पहले से ही एक एफआईआर दर्ज है, लिहाजा दोबारा दर्ज एफआईआर गलत है। इसलिए केस में पेश की गई एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट खारिज की जाए। इसी पर अदालत ने शुक्रवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
ये हैं हाईकोर्ट के फैसले के मायने
सियासी तौर पर… 2017 में केस चुनावी मुद्दा था, अब 2022 के चुनाव में भी मुद्दा बनेगा
2017 का विधानसभा चुनाव में बेअदबी की घटना व कोटकपूरा गोलीकांड की जांच करवाने व आरोपियों को सजा दिलाने का अहम मामला रहा था। सरकार ने सत्ता में आकर इसके लिए पहले जस्टिस रणजीत सिंह आयोग व एसआईटी गठित कर आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों पर केस दर्ज किया था। अब आगामी एक साल में फिर से प्रदेश में चुनाव हैं, मगर एसआईटी के भंग होने व एफआईआर के खारिज होने से सियासी तौर पर सरकार की चिंताएं बढ़ गई है। अब 2022 के चुनाव में भी सियासी गलियारों में बड़ा मुद्दा बनेगा।
कानूनी तौर पर… बेअबदी, बहबलकलां फायरिंग केस की जांच पर पड़ेगा असर
जिस एसआईटी को भंग करने के निर्देश दिए गए हैं,बरगाड़ी बेअदबी व बहबलकलां केस की जांच भी उसी के पास है। इसमें अब तक कुल 9 चालान पेश हो चुके हैं। 10वां पेश करने से पहले कानूनी राय के लिए भेजा गया है। मगर कोटकपूरा फायरिंग केस व एसआईटी को रद्द करने के संबंध में आए महत्वपूर्ण फैसले से इस केस में कोर्ट में चल रहे संबंधित केसों पर भी असर पड़ेगा। क्योंकि कोटकपूरा फायरिंग केस में आरोपी बनाए गए पुलिस अधिकारियों में से कई को बहबलकलां फायरिंग केस में आरोपी बनाया गया है।
आरोपी पुलिस अफसरों ने एसआईटी के खिलाफ दायर की थी याचिका
2015 में बरगाड़ी में हुई बेअदबी के विरोध में सिखों ने बरगाड़ी व कोटकपूरा में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों व पुलिस में झड़प के दौरान कोटकपूरा व बहबलकलां में फायरिंग की घटनाएं हुईं। बहबलकलां में 2 युवक मारे गए। तत्कालीन शिअद सरकार ने 14 अक्टूबर 2015 को अज्ञात पर केस दर्ज किया था, मगर जांच आगे नहीं बढ़ी। 2017 में कांग्रेस सरकार ने एसआईटी बनाई, जिसमें एडीजीपी प्रवोद कुमार, आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह, एसएसपी सतिंद्र सिंह व अन्य अधिकारी शामिल किए। एसआईटी ने आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, एसएसपी चरणजीत शर्मा को गिरफ्तार किया। नामजद कई पुलिस अफसरों ने जांच पर सवाल उठा हाईकोर्ट में रिट दी थी।

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