नहीं मानेगा संयुक्त किसान मोर्चा : ऐलान- एमएसपी बिल आने और बिजली शोध एक्ट रद्द होने तक जारी रहेगा संघर्ष, पीएम के बयान पर तंज कसा लुधियाना : (पी9
नहीं मानेगा संयुक्त किसान मोर्चा : ऐलान- एमएसपी बिल आने और बिजली शोध एक्ट रद्द होने तक जारी रहेगा संघर्ष, पीएम के बयान पर तंज कसा
लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :

संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तंज कसा है। मोर्चा ने कहा- प्रधानमंत्री का बयान किसानों और सरकार के बीच हुईं 11 मीटिंगों के जैसा ही रहा है। बेशक मोदी सरकार ने कृषि कानून वापस ले लिए, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा मानने वाला नहीं है। हम प्रधानमंत्री के ऐलान का स्वागत करते हैं, मगर हमारा आंदोलनएमएसपी बिल और बिजली शोध कानूनों को लेकर भी है। वह अभी मीटिंग करने जा रहे हैं और इस पर अगली रणनीति का ऐलान करेंगे।
प्रेस विज्ञप्ति में लिखा गया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2020 में ऑर्डिनेंस के रूप में लाए गए काले कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा की है। संयुक्त किसान मोर्चा इस फैसले का स्वागत करता है, मगर हम उचित संसदीय प्रक्रिया के जरिए इस ऐलान के लागू होने की राह देखेगा। इस संघर्ष में 700 के करीब किसान शहीद हो चुके हैं, लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा समेत अन्य हिंसात्मक प्रदर्शनों के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है।
संयुक्त किसान मोर्चा प्रधानमंत्री मोदी को याद दिलाता है कि किसानों का आंदोलन तीन काले कानूनों को लेकर ही नहीं था, बल्कि सभी कृषि उपजों और सभी किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए भी है। किसानों की अहम मांग अभी भी लटक रही है, जिसमें बिजली शोध बिल वापस लेना भी शामिल है। संयुक्त किसान मोर्चा सभी गतिविधियों के नोट करेगा और जल्द ही अपनी मीटिंग रखेगा व अगले फैसलों का ऐलान करेगा।
1 साल 11 बैठक, नतीजा जीरो
कृषि कानूनों को लेकर पिछले 14 माह से किसानों का संघर्ष चल रहा है। पहले पंजाब में और 26 नवंबर 2020 से दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर संघर्ष चल रहा है। किसानों की सरकार से जनवरी 2021 तक 11 बैठक हो चुकी हैं, जिसमें कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर शामिल होते रहे हैं, मगर हर बार बात नहीं बनी। पहले कहा जा रहा था कि बिलों में संशोधन किया जा सकता है, मगर ऐसा भी नहीं हुआ।
संसद कूच पर भी लिया जाना है फैसला
26 नवंबर को दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का एक साल पूरा हो रहा है। इसे लेकर किसानों की तरफ से 29 नवंबर से दिल्ली संसद के लिए ट्रैक्टर मार्च का ऐलान किया गया है। अब इस पर फैसला होना है कि वह यह कार्यक्रम करते हैं या इसे टाला जाता है।

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