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दुर्गा पूजा और नवरात्रे मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है : अमन/ऋषि/अनुज

दुर्गा पूजा और नवरात्रे मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है : अमन/ऋषि/अनुज

दुर्गा पूजा और नवरात्रे मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है : अमन/ऋषि/अनुज श्री बालाजी मंदिर में नवरात्रे महोत्सव आरम्भ, विधि विधान के

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स्व: प्रधान श्री अशोक जैन जी की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में श्री रामायण पाठ : अमन जैन

दुर्गा पूजा और नवरात्रे मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है : अमन/ऋषि/अनुज

श्री बालाजी मंदिर में नवरात्रे महोत्सव आरम्भ, विधि विधान के साथ की गई भगवती मां शैलपुत्री व माता व्रह्मचारिणी जी का पूजन

लुधियाना : (सतीश प्रणामी चीफ एडिटर) :

सिद्ध पीठ महाबली संकटमोचन श्री हनुमान मंदिर हैबोवाल कलां,शंकराचार्य नगर मंदिर में विक्रमी संवत नव वर्ष व नवरात्रे महोत्सव पूर्ण विधिविधान के साथ आरम्भ किये गये।मंदिर के आचार्यो द्वारा मां भगवती की मंत्रो उच्चारण के साथ पवित्र 108 ज्योतें प्रजवलित की गई व मां भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री व माता व्रह्मचारिणी जी की पूजा अर्चना की गई। नवरात्रे महोत्सव मंदिर प्रधान अमन जैन की अध्यक्षता में आरम्भ किये गये।सरप्रस्त ऋषि जैन इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित हुए। प्रधान अमन जैन , सेवक अनुज मदान, सौरव जैन द्वारा मां भगवती की आरती की गई व इसके अतिरिक्त सेवक ज्योति गुप्ता, संजय गुप्ता, सोमनाथ मड़कन, अरविन्द टिल्लू , नरिंदर नथानी दरबार में उपस्थित हुए।

कलश स्थापित किये

इस अवसर पर अमन जैन ने कहा कि नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। जिसमे चैत्र और आश्विन की नवरात्रियों का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि से ही विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इन दिनों प्रकृति से एक विशेष तरह की शक्ति निकलती है। इस शक्ति को ग्रहण करने के लिए इन दिनों में शक्ति पूजा या नवदुर्गा की पूजा का विधान है। 

ऋषि जैन ने कहा कि मंदिर प्रांगण में हर उत्सव हर पर्व श्रद्धा भावना के साथ प्रधान स्व अशोक जैन की प्रेरणा से मनाये जाते आ रहे है ओर सनातन धर्म के प्रचार के लिए हमारा यह प्रयास जारी रहेगा। 

सेवक अनुज मदान ने कहा कि नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर दुर्गा देवी के नौ रूपों की पूजा-उपासना बहुत ही विधि विधान से की जाती है। मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के यहाँ पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नामकरण शैलपुत्री हुआ। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं।  उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। संध्या चौंकी अवसर पर भजन गायिका पूजा वर्मा एंड पार्टी (संगरूर) द्वारा दरबार में अपने भजनो के माध्यम से हाजिरी लगाई, श्री हनुमान चालीसा के उपरांत संध्या चौंकी को विराम दिया गया। इस अवसर पर संदीप पब्बी, राहुल ऑप्टिकल, सुनील कैटर, दीपक घई, रोहित डंग, साहिल डंग, नरिंदर मित्तल, हन्नी कौशल, संदीप धमीजा, भारती सोनी, विश्ववनाथ सेठी, वेद लूथरा, आदि उपस्थित हुए।

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