आरटीए दफ्तर के क्लर्क-रिकॉर्ड रूम की चाबियां एजेंटों के पास, जनता की बजाय एजेंटों के काम हो रहे हैं पहले एजेंटों के हाथों में सरकारी सिस्टम, क्लर्
आरटीए दफ्तर के क्लर्क-रिकॉर्ड रूम की चाबियां एजेंटों के पास, जनता की बजाय एजेंटों के काम हो रहे हैं पहले
एजेंटों के हाथों में सरकारी सिस्टम, क्लर्क अपने दफ्तर में नहीं, एजेंट के कैबिन में बैठ चला रहे दफ्तर
लुधियाना : (पी9 ब्यूरो) :

आरटीए दफ्तर के रिकॉर्ड रूम और क्लर्क दफ्तर की चाबियां एजेंटों के हाथों में हैं। ये एजेंट मुलाजिमों के हर तरह के काम करते हैं। साथ ही मोटी कमाई भी करते हैं। आरटीए दफ्तर में इस समय तीन क्लर्क हैं। इनके दफ्तर की चाबियां इन एजेंटों के हाथों में ही रहती हैं।
यही नहीं बेसमेंट में बने रिकॉर्ड रूम की चाबियां भी एजेंटों के हाथों में हैं, जहां उनका पूरा कब्जा है। जब तक यह तैनात एजेंट नहीं आ जाते, तब तक दरवाजा नहीं खुलता। चाहे किसी व्यक्ति को जितना भी जरूरी काम क्यों न हो। सुबह दफ्तर खुलने से लेकर शाम ऑफिस बंद करने तक की जिम्मेदारी एजेंट ही संभालते हैं। यानी दफ्तर का सरकारी रिकॉर्ड इन प्राइवेट एजेंटों के हाथ में हैं। एजेंट के नहीं आने पर आम आवेदकों का काम भी नहीं हो पाता।
मॉडल टाउन के रहने वाले आवेदक विशाल शर्मा ने बताया कि आरसी की बैकलॉग एंट्री के लिए अप्लाई किया है। अभी तक न तो डॉक्यूमेंट वेरिफाई हुए और न ही अप्रूवल आई। इसके लिए आरटीए दफ्तर के 3 चक्कर काट चुके हैं।
एजेंट के कैबिन को बनाया हुआ सरकारी दफ्तर
आरटीए सेक्रेटरी के सामने एक क्लर्क को एक नंबर कमरा दिया गया है, जहां पर बैठकर ही वह सारा काम करते हैं। मगर वह अपनी सीट पर नहीं बैठते और एजेंट के कैबिन में ही अधिकतर समय बिताते हैं, जहां पर एजेंट फाइल लेकर काम करवाने के लिए पहुंचते हैं।
क्लर्कों ने ऊपर से पैसे कमाने के लिए अपने साथ प्राइवेट व्यक्ति भी रखे हुए हैं, जोकि क्लर्क का सारा काम संभालते हैं। लोगों से काम करवाने के मनमर्जी के पैसे भी वसूलते हैं। अगर एजेंट के जरिए आवेदक बैकलॉग एंट्री डलवाता है तो काम कुछ ही समय में हो जाता है। अगर वह अपने आप ऑनलाइन ढंग से अप्लाई कर बैकलॉग डलवाने के लिए दफ्तर जाता है तो उसे कई दिन चक्कर काटने पड़ते हैं।
एसटीसी का बेतुका बयान- शनिवार-रविवार को होता है आराम का दिन वहीं, इस संबंध में जब एसटीसी अमरपाल से पूछा गया कि आरटीए दफ्तर में एजेंटों का राज है तो क्या क्लर्कों के कमरे और रिकॉर्ड रूम की चाबियां भी एजेंटों के पास होती हैं तो उन्होंने कहा कि वे शनिवार-रविवार को परिवार के साथ होते हैं। 5 बजे के बाद कोई आधिकारिक बात नहीं करते। वहीं, जब आधिकारिक तौर पर कार्रवाई को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सोमवार को दफ्तर के समय 5 बजे से पहले करो। शनिवार-रविवार को आराम का दिन होता है।
अंदर से बाहर तक एजेंटों का पहरा
लाइसेंस और आरसी बनवाने से लेकर चालान के भुगतान तक के लिए एजेंटों का पहरा डीसी दफ्तर से लेकर आरटीए दफ्तर तक रहता है। अगर कोई व्यक्ति काम करवाने आता है तो एजेंट उसे बाहर ही रोक लेते हैं, जब वह क्लर्क के पास जाता है तो उसे कहा जाता है कि अभी स्टाफ नहीं है। बाद में आने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।
संदीप सिंह, आरटीए सेक्रेटरी से बात
प्रशन : आरटीए दफ्तर में क्लर्कों के दफ्तर और रिकॉर्ड रूम की चाबियां क्या एजेंटों के पास होती हैं?
जवाब -नहीं, ऐसा नहीं है।
प्रशन : क्या सुबह-शाम एजेंट ही कमरों का ताला खोलते और बंद करते हैं?
जवाब -किसी एजेंट के पास किसी कमरे की चाबी नहीं है, फिर भी मैं चेक करवाऊंगा।
प्रशन : क्या दफ्तर के क्लर्क अपने कमरे में नहीं बैठते?
जवाब -चेक करवाएंगे कि किस एजेंट के कैबिन में बैठकर काम हो रहा है।

COMMENTS